सरकारी उत्खनन से उजागर हो रहा लक्कुंडी का ऐतिहासिक अतीत, संभावित विस्थापन को लेकर ग्रामीण चिंतित

21 Jan 2026 14:12:53
Excavations


गदग, 21 जनवरी (हि.स.)। कर्नाटक के गदग तालुक स्थित ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव में सरकारी उत्खनन कार्य में तेजी आ गई है। खुदाई के दौरान लगातार प्राचीन पुरातात्विक अवशेष सामने आने से जहां गांव में उत्सुकता और जिज्ञासा का माहौल है, वहीं मंदिर परिसरों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में संभावित विस्थापन को लेकर चिंता भी गहराती जा रही है।

किसी निधि अथवा महत्वपूर्ण पुरावशेष की जानकारी मिलने के बाद लक्कुंडी के विभिन्न हिस्सों में उत्खनन कार्य शुरू किया गया। विशेष रूप से नागनाथ मंदिर के आसपास रहने वाले 18 से अधिक परिवारों में असमंजस की स्थिति है। इन परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं और बिना समुचित मुआवजा एवं वैकल्पिक भूमि के वे स्थानांतरण को स्वीकार नहीं करेंगे।

स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट रूप से कहा, “यदि हमारी जमीन के बदले उचित मुआवजा और समकक्ष भूमि दी जाती है, तभी हम स्थानांतरण के लिए तैयार होंगे। बराबर जमीन दिए बिना हम अपना घर नहीं छोड़ेंगे।”

इधर, लक्कुंडी किले के भीतर स्थित वीरभद्रेश्वर मंदिर के समीप उत्खनन कार्य बुधवार को छठे दिन में प्रवेश कर गया। यह अभियान पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा लक्कुंडी विकास प्राधिकरण की निगरानी में संचालित किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 35 मजदूर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक अत्यंत सावधानी और सूक्ष्मता के साथ खुदाई कार्य में जुटे हुए हैं।

उत्खनन के दौरान अब तक कई प्राचीन संरचनात्मक अवशेष, पत्थर की कलाकृतियां और स्थापत्य अवयव प्राप्त हुए हैं, जो लक्कुंडी के समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अतीत की पुष्टि करते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण खोज एक प्राचीन पानिपीठिका (पीठ) की रही है, जिसने पुरातत्व विशेषज्ञों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है।

प्रारंभ में इस पानिपीठिका को शिवलिंग से संबंधित माना जा रहा था, लेकिन पीठ पर उकेरे गए गरुड़ चिह्न के आधार पर विशेषज्ञों का मत है कि यह विष्णु या केशव देव से संबंधित हो सकती है। सुखासन मुद्रा में बैठे गरुड़ की आकृति वाली यह पानिपीठिका 12वीं–13वीं शताब्दी की बताई जा रही है।

पुरातत्वविदों के अनुसार, यह अवशेष कल्याण चालुक्य शासनकाल के प्रसिद्ध केशवादित्य मंदिर से जुड़ा हो सकता है। यदि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि होती है, तो यह खोज लक्कुंडी के धार्मिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक इतिहास को समझने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाएगी।

लक्कुंडी गांव में जैसे-जैसे उत्खनन कार्य आगे बढ़ रहा है, लक्कुंडी की ऐतिहासिक विरासत की नई परतें खुलने की उम्मीद बढ़ती जा रही है। साथ ही, स्थानीय निवासियों के अधिकारों, उचित मुआवजे और संवेदनशील पुनर्वास नीति को लेकर सरकार से स्पष्ट और ठोस कदम उठाने की मांग भी तेज होती जा रही है।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा

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