नेपाल के संसदीय चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री मैदान में

21 Jan 2026 19:32:53
प्रतिनिधि सभा चुनाव में मैदान में उतरे चार पूर्व प्रधानमंत्री


काठमांडू, 21 जनवरी (हि.स.)। नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के पांच मार्च को होने वाले चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री चुनावी मैदान में हैं, जबकि दो पूर्व प्रधानमंत्रियों को उनकी पार्टियों ने उम्मीदवार नहीं बनाया है।

चार पूर्व प्रधानमंत्रियों में- नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के संयोजक पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ एवं सह-संयोजक माधव कुमार नेपाल और प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के नेता डॉ. बाबूराम भट्टराई हैं।

इस बार दो पूर्व प्रधानमंत्रियों ने प्रतिनिधि सभा के चुनाव के लिए नामांकन नहीं किया है। चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नेपाली कांग्रेस के निवर्तमान सभापति शेरबहादुर देउबा इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। नेपाली कांग्रेस के विशेष महाधिवेशन को अवैध बताते हुए उच्चतम न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ रहे देउबा को नेपाली कांग्रेस ने चुनाव में न उतारने का निर्णय लिया।

नेकपा ने पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल को इस बार संसदीय चुनाव में नहीं उतारा है। खनाल इससे पहले इलाम–1 से चुनाव लड़ते रहे थे, लेकिन इस बार वहां से नेकपा ने पूर्व मेयर को उम्मीदवार बनाया है।

देउबा और खनाल को छोड़कर पूर्व प्रधानमंत्री ओली, प्रचंड, नेपाल और भट्टराई चुनावी मैदान में हैं। ओली झापा–5 निर्वाचन क्षेत्र से, प्रचंड रूकुम पूर्व से, माधव कुमार नेपाल रौतहट–1 से और बाबूराम भट्टराई गोरखा–2 से चुनाव लड़ रहे हैं।

ओली जिस झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ते आए हैं, वहां इस बार मुकाबला बेहद रोचक होने की संभावना है। इस बार इस सीट से काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन्द्र शाह ‘बालेन’ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की ओर से ओली के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।

हर संसदीय चुनाव में निर्वाचन क्षेत्र बदलने वाले प्रचंड इस बार रूकुम पूर्व से उम्मीदवार हैं। रूकुम पूर्व क्षेत्र माओवादी सशस्त्र संघर्ष का आधार रहा है और वर्ष 2007 के बाद हुए सभी चुनावों में यहां से माओवादी उम्मीदवार ही जीतते आए हैं। इससे पहले प्रचंड ने रोल्पा 2, काठमांडू 10, गोरखा 2, सिरहा 5, चितवन 3 से चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमाया था।

माओवादी शांति प्रक्रिया के बाद हुए पहले संविधान सभा चुनाव में भट्टराई ने गोरखा–2 से देशभर में सबसे अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि इस बार चुनाव न लड़ने की घोषणा के बावजूद उन्होंने अंतिम समय में गोरखा–2 से प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से नामांकन दाखिल किया है। राष्ट्रीय राजनीति में पहचान होने के बावजूद राजनीतिक अस्थिरता के कारण हाल के वर्षों में उनकी सांगठनिक शक्ति कमजोर हुई है।

पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल इस बार भी अपने गृह जिले रौतहट–1 से नेकपा की ओर से चुनावी मैदान में हैं। इस क्षेत्र से वे वर्ष 1999 के आम चुनाव, 2013 की दूसरी संविधान सभा और 2022 के चुनाव में विजयी हुए थे। हालांकि 2007 की पहली संविधान सभा के चुनाव में उन्हें इसी क्षेत्र से माओवादी उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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