
रांची, 22 जनवरी (हि.स.)। पुलिस महानिदेशक, झारखंड और महानिदेशक, सीआरपीएफ के संयुक्त नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान मेगाबुरू के तहत सुरक्षा बलों को पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के सारंडा जंगली क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन अभियान में बड़ी सफलता मिली है। इस मुठभेड़ में उच्च इनामी नक्सली मारे गए हैं।
आईजी अभियान माइकल राज एस और आईजी सीआरपीएफ साकेत सिंह ने संयुक्त रुप से पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता में बताया कि किरीबुरू थाना क्षेत्र के अंतर्गत इस अभियान में 209 कोबरा, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और जिला पुलिस बल की संयुक्त टीम ने शीर्ष माओवादी अनल उर्फ पतिराम मांझी के सशस्त्र दस्ते के साथ गुरुवार की सुबह करीब 6:30 बजे से कई दौर की मुठभेड़ हुई। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए अंधाधुंध गोलीबारी की, लेकिन जवानों ने आत्मरक्षा में प्रभावी जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान अब तक 15 नक्सलियों के शव बरामद हो चुके हैं। साथ ही, भारी मात्रा में हथियार और दैनिक उपयोग की सामग्री भी जब्त की गई है।
प्रारंभिक जांच में मृत नक्सलियों में से 13 की पहचान हो चुकी है, जिनमें अधिकांश उच्च इनामी उग्रवादी शामिल हैं। मारे गए प्रमुख नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम अनल उर्फ पतिराम मांझी (सीसीएम) का है, जिस पर झारखंड में एक करोड़ रुपये, ओडिशा में एक करोड़ 20 लाख रुपये और एनआईए की ओर से 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके नाम पर कुल 149 अपराधिक मामले दर्ज हैं।
मारे गए नक्सलियों की सूची
-अनमोल उर्फ सुशांत (बीजेएसएसी): 25 लाख (झारखंड), 65 लाख (ओडिशा), कुल 90 लाख; 149 कांड
-अमित मुंडा (आरसीएम): 15 लाख (झारखंड), 43 लाख (ओडिशा), 4 लाख (एनआईए), कुल 62 लाख, 96 कांड
-पिंटू लोहरा (एसजेडसी): 5 लाख (झारखंड); कुल 47 कांड
-लालजीत उर्फ लालू (एसजेडसी): 5 लाख (झारखंड)
-राजेश मुंडा (एसीएम): कुल 14 कांड
-बुलबुल अलदा (एसीएम): कुल 8 कांड
-बबीता (एसीएम): कुल 16 कांड
-पूर्णिमा (एसीएम): कुल 5 कांड
-सुरजमुनी (कैडर)
-जोंगा (कैडर)
-समीर सोरेन: 5 लाख
-सोमवारी (कैडर)
मारे गए सभी नक्सली कोल्हान के सारंडा जंगल में सक्रिय थे और पिछले तीन वर्षों से सुरक्षा बलों पर हमलों में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। विशेष रूप से 2022 से अब तक सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों की ओर से किए गए विस्फोटों और हिंसक कार्रवाइयों में अनल उर्फ पतिराम मांझी का हाथ प्रमुख था।
अनल दा गिरिडीह जिले का निवासी था और लंबे समय से सारंडा के घने इलाकों में छिपकर संगठन की रणनीति तैयार कर रहा था। यह एनकाउंटर नक्सल उन्मूलन के लिए एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है, क्योंकि अनल दा जैसे शीर्ष नेता का सफाया संगठन की संरचना को बुरी तरह प्रभावित करेगा। अनल दा (पतिराम मांझी उर्फ तूफान) सीपीआई (माओवादी) की झारखंड-बिहार स्पेशल एरिया कमेटी से जुड़े थे और संगठन के प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। पिछले कई वर्षों से वह सारंडा क्षेत्र में सक्रिय था और सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बनाने में शामिल रहा। उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या भी काफी अधिक है। इसके बाद झारखंड में एक करोड़ के इनामी नक्सलियों की संख्या अब काफी कम रह गई है, जिसमें मिसिर बेसरा जैसे नाम प्रमुख हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे