




- कठपुतली नाट्य में उभरी युद्ध की त्रासदी
भोपाल, 22 जनवरी (हि.स.)। देश में पहली बार मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित हो रहे सभ्यताओं के संघर्ष एवं औदार्य की महागाथा पर केंद्रित महाभारत समागम के सातवें दिन गुरुवार की शाम दर्शकों को विविध कलात्मक प्रस्तुतियों का सशक्त अनुभव प्राप्त हुआ। इस दौरान पंडवानी, सौगंधिका हरणम् एवं महाभारत का मंचन हुआ।
वीर भारत न्यास द्वारा भारत भवन में आयोजित महाभारत समागम में बहिरंग मंच पर प्रसिद्ध रंगकर्मी अनुरूपा राय के निर्देशन में महाभारत की प्रभावशाली प्रस्तुति हुई, जिसे कठकला पपेट आर्ट्स ट्रस्ट, नई दिल्ली ने प्रस्तुत किया। इससे पहले पूर्वरंग मंच पर छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा पर आधारित रितु वर्मा निर्देशित पंडवानी की प्रस्तुति ने लोक-संवेदना के साथ महाभारत कथा को जीवंत किया। वहीं अंतरंग सभागार में पियाल भट्टाचार्य के निर्देशन में संस्कृत नाट्य परंपरा से जुड़ा सौगंधिका हरणम् मंचित हुआ, जिसे दर्शकों ने सराहा। कार्यक्रम के अंत में वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने सभी कलाकारों को मोमेंटो भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
अनुरूपा राय निर्देशित महाभारत प्रस्तुति कठपुतली कला के माध्यम से युद्ध, भाग्य, अहंकार और धर्म की गहरी त्रासदी को उजागर करती है। कथा के केंद्र में गांधारी, कृष्ण और बर्बरीक जैसे तीन प्रमुख पात्र हैं। गांधारी का जीवन त्याग और पीड़ा का प्रतीक है, जिसने अपने अंधे पति धृतराष्ट्र के साथ समानता के लिए जीवन भर आंखों पर पट्टी बांधे रखी। युद्ध के बाद पुत्रों के मृत शरीर देखने और कृष्ण को श्राप देने का प्रसंग दर्शकों को भावुक कर गया।
कृष्ण का चरित्र यहाँ रणनीतिकार और धर्म-रक्षक के रूप में उभरता है, जो बिना हथियार उठाए युद्ध की दिशा तय करते हैं। वहीं बर्बरीक का प्रसंग कथा को दार्शनिक ऊंचाई देता है। युद्ध देखने वाले बर्बरीक का निष्कर्ष है कि युद्ध में न कोई विजेता होता है, न पराजित- पूरी प्रस्तुति का सार बन जाता है।
सौगन्धिका हरणम् में भीम–हनुमान मिलन की दिव्य कथा
महाभारत समागम के अंतर्गत अंतरंग सभागार में पियाल भट्टाचार्य निर्देशित नाट्य प्रस्तुति सौगन्धिका हरणम् का मंचन हुआ। यह कथा महाभारत के पांडवों के वनवास काल से जुड़ी है। एक दिन द्रौपदी के पास हवा के साथ एक अद्भुत और सुगंधित सौगन्धिक पुष्प आ गिरता है। पुष्प की सुगंध और सौंदर्य से मोहित होकर द्रौपदी भीम से ऐसे ही और पुष्प लाने का आग्रह करती हैं। द्रौपदी की इच्छा पूर्ण करने के लिए भीम घने और रहस्यमय वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
भीम की अपार शक्ति और वेग से वन में हलचल मच जाती है। पशु-पक्षी और वनवासी भयभीत हो उठते हैं। अनजाने में भीम कुबेर के दिव्य उपवन की ओर बढ़ जाते हैं, जहाँ सौगन्धिक पुष्प प्रचुर मात्रा में खिलते हैं और जिसे गंधर्व तथा किन्नर संरक्षित करते हैं।
इस संकट को भांपकर पवनपुत्र हनुमान, जो भीम के अग्रज भ्राता हैं, वृद्ध और निर्बल वानर का रूप धारण कर मार्ग में लेट जाते हैं। भीम उन्हें हटाने का प्रयास करते हैं, पर अपनी पूरी शक्ति के बावजूद हनुमान की पूँछ तक नहीं हिला पाते। तब भीम को अपनी सीमाओं का बोध होता है। हनुमान अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट होकर भीम को विनय, विवेक और धर्म का उपदेश देते हैं।
पंडवानी गायन में लोकस्मृति और महाभारत की जीवंत कथा
पूर्व रंग के मंच पर छत्तीसगढ़ की लोकगायिका रितु वर्मा द्वारा प्रस्तुत पंडवानी गायन ने दर्शकों को भारतीय लोक-संस्कृति की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया। पंडवानी महाभारत और पांडवों के जीवन पर आधारित एक सशक्त लोक गायन शैली है, जिसमें कथा, अभिनय और संगीत का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। सरल लोकभाषा, भावपूर्ण गायन और नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से वीरता, धर्म और न्याय के प्रसंग सजीव हो उठे।
द आर्चर हू स्टूड अलोन से हुआ कठपुतली समारोह शुभारंभ
वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित नौ दिवसीय समागम अंतर्गत गुरुवार को भारत भवन के अभिरंग रंगमंच पर विशेष कठपुतली समारोह आयोजित किया गया। समारोह का शुभारंभ कोलकाता के डॉल्स थियेटर द्वारा प्रस्तुत प्रसिद्ध कठपुतली नाटक “द आर्चर हू स्टूड अलोन” की प्रस्तुति से हुआ। जिसका निर्देशन सुदीप गुप्ता ने किया। एकलव्य पर आधारित इस प्रस्तुति में प्रतिभा, भक्ति और बलिदान के नैतिक द्वंद्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। सामाजिक अस्वीकृति के बावजूद गुरु के प्रति समर्पण और कठोर साधना से एकलव्य महान धनुर्धर बनता है। गुरु-दक्षिणा में अंगूठा अर्पित करने का उसका त्याग दर्शकों को गहरे भाव से भर देता है। इसके साथ ही मानसिंह झाला निर्देशित आठवां की प्रस्तुति भी हुई।
शुक्रवार की प्रस्तुति
महाभारत समागम के आठवें दिन शुक्रवार की प्रस्तुतियों में पूर्व रंग के मंच पर सायं 5 बजे पृथ्वीराज क्वाथर, उडुपी-कर्नाटक द्वारा यक्षगान, अंतरंग सभागार में निवेदिता महापात्रा द्वारा द्रौपदी, हिरोशी कोइके द्वारा निर्देशित नाट्य प्रस्तुति महाभारत एवं बहिरंग के मंच पर जयंत देशमुख निर्देशित मृत्युंजय की प्रस्तुति होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर