
नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। गणतंत्र दिवस 2026 की परेड इस बार भारत के विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की अनूठी विरासत, शौर्य और भविष्यवादी दृष्टि का संगम होने जा रही है। दिल्ली कैंट में तैयार की जा रही कर्तव्य पथ पर निकलने वाली झांकियों में इस वर्ष लद्दाख के अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर राजस्थान की सुनहरी उस्ता कला और मध्य प्रदेश की 'महेश्वरी साड़ी' तक 'विकसित भारत' की एक झलक दिखाई देगी।
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के उप सचिव, नज़ीर हुसैन ने गुरुवार को कहा, इस बार लद्दाख की थीम 'तारों के नीचे खानाबदोश' रखी गयी है। लद्दाख की झांकी इस बार अपनी विशिष्ट पहचान को 'विज्ञान और बलिदान' के माध्यम से प्रस्तुत करेगी। झांकी में हनले खगोलीय वेधशाला को प्रदर्शित किया जायेगा, जो भारत का पहला डार्क स्काई अभयारण्य का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि जहां गलवान घाटी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई है, वहीं दूसरी ओर चांगथांग पठार के 'चांगपा' समुदाय और उनकी प्रसिद्ध पश्मीना बकरियों के साथ खानाबदोश जीवन को दर्शाया गया है। श्योक सुरंग का मॉडल क्षेत्र में बढ़ती कनेक्टिविटी और सुरक्षा तैयारियों को रेखांकित करता है। वहीं, राजस्थान की झांकी बीकानेर की विश्व प्रसिद्ध 'उस्ता कला' (ऊंट की खाल पर सोने की मीनाकारी) की भव्यता बिखेर रही है। झांकी में 24 कैरेट सोने की पत्ती से की गई जादुई मीनाकारी और विशाल सजे-धजे ऊंट का प्रदर्शन किया गया है। झांकी के आगे 'रावणहत्ता' लोक वाद्य यंत्र बजाते कलाकार और दोनों ओर 'गैर नृत्य' करते नर्तक राजस्थान की जीवंत ऊर्जा को जीवंत कर रहे हैं।
केंद्र सरकार के नोडल ऑफिसर संजय सक्सेना ने बताया कि इस वर्ष की विशेष झांकी महारानी अहिल्याबाई होलकर को समर्पित है। यह झांकी उनकी 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में तैयार की गई है। झांकी को महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर महिला के आदर्श पर तैयार की गयी है।
उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई होलकर द्वारा देश भर के जीर्ण-शीर्ण मंदिरों के पुनरुद्धार और उनके कुशल प्रशासन को सनातनी धर्म के प्रतीक के रूप में दिखाया जाएगा।
शिक्षा मंत्रालय की झांकी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय स्कूल शिक्षा के बदलते स्वरूप को दिखाया जाएगा। झांकी के अग्रभाग में महान गणितज्ञ आर्यभट बच्चों को आशीर्वाद दे रहे हैं। यहां बच्चे 'वर्चुअल रियलिटी' हेडसेट पहने हुए 'प्राचीन जड़ें, डिजिटल कौशल' का संदेश दे रहे हैं। 2047 के टॉवर और रोबोटिक हाथों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि कैसे आधुनिक प्रयोगशालाएँ और स्मार्ट कक्षाएँ भारत के भविष्य को आकार दे रही हैं।
वहीं, मध्य प्रदेश की झांकी 'पुण्यश्लोक' देवी अहिल्याबाई होलकर के सुशासन और नारी सशक्तीकरण को समर्पित है। झांकी के अग्रभाग में शिवलिंग धारण किए देवी अहिल्याबाई की सौम्य प्रतिमा है। झांकी में महेश्वर के प्रसिद्ध घाट, किले और मंदिर के साथ-साथ प्रसिद्ध 'महेश्वरी साड़ी' बुनती महिलाओं को दिखाया गया है, जो स्वदेशी उत्पाद और महिला आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
उत्तर प्रदेश ने इस बार प्राचीन कालिंजर दुर्ग के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक गहराई और आधुनिक प्रगति का मेल तैयार किया है। अग्रभाग में कालिंजर का प्रसिद्ध 'एकमुख लिंग' स्थापित है। यह झांकी बुंदेलखंड के मृद्भांड और मनका शिल्प जैसे 'एक जिला एक उत्पाद' को प्रदर्शित करेगी।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में इस बार कुल 30 झांकियां हिस्सा लेंगी। इनमें 17 झांकियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी, जबकि 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की होंगी। इसका मुख्य विषय 'स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम' और 'समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत' रहेगा, जो इस साल की प्रदर्शनी 'वंदे मातरम' के 150 वर्षों के गौरवशाली इतिहास और भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का एक अद्भुत संगम होगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी