नेपाल–चीन वाणिज्य सचिव स्तरीय बैठक में काठमांडू–ल्हासा बस सेवा पुनः शुरू करने पर सहमति

23 Jan 2026 20:53:53
प्रतीकात्मक तस्वीर


काठमांडू, 23 जनवरी (हि.स.)। नेपाल और चीन के बीच हुई वाणिज्य सचिव स्तरीय बैठक में काठमांडू–ल्हासा बस सेवा को पुनः संचालित करने पर सहमति बनी है। 22-23 जनवरी को चीन के ल्हासा में संपन्न तीसरी वाणिज्य सचिव स्तरीय बैठक में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, पारवहन, सीमा शुल्क सहजीकरण, तकनीकी सहयोग तथा व्यापार अवसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के सचिव डॉ. रामप्रसाद घिमिरे ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सिचांग (तिब्बत) जन सरकार के उपाध्यक्ष चाओ पेंग ने किया।

नेपाल के वाणिज्य सचिव घिमिरे ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच 1981 के व्यापार तथा भुगतान समझौते के समसामयिक संशोधन, व्यापारियों, चालकों और सहचालकों के लिए सीमा प्रवेश पास को सरल बनाने, टोखा–छहरे सुरंग निर्माण प्रक्रिया को तेज करने, रासायनिक उर्वरक आयात के लिए कोटा निर्धारण, नेपाल के अल्पविकसित राष्ट्र से स्तरोन्नति के बाद भी चीन की शून्य-शुल्क नीति को जारी रखने तथा आपदा के समय चीनी पक्ष द्वारा वैकल्पिक मार्ग सुविधा देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

घिमिरे ने कहा कि सीमा सुरक्षा के लिए दोनों पक्षों ने आपसी समन्वय से कानून प्रवर्तन को और प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता जताई गई।

उन्होंने कहा कि मौसम अनुकूल होते ही काठमांडू से ल्हासा बस सेवा को पुनः संचालित करने पर सहमति बनी है। इस संबंध में दोनों पक्ष के अधिकारी निरंतर संपर्क में रहेंगे और आपसी सहमति के अनुसार बस सेवा का संचालन किया जाएगा।

वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि रसुवा के टिमुरे स्थित आईसीपी निर्माण कार्य को निरंतर जारी रखने, मुस्ताङ के कोरला नाके के दोनों ओर सीमा शुल्क प्रक्रिया को सरल बनाने, कोरला नाके में आईसीपी निर्माण प्रक्रिया तेज करने, हिल्सा–सिमिकोट सड़क तथा रसुवा–स्याफ्रुबेसी सड़क निर्माण में नेपाल द्वारा सहजीकरण और चीन द्वारा निर्माण को तीव्र करने पर भी चर्चा हुई।

इस तंत्र की चौथी बैठक आपसी सहमति से तिथि तय कर वर्ष 2027 में नेपाल में आयोजित करने पर भी सहमति बनी।

नेपाली प्रतिनिधिमंडल में नेपाल राष्ट्र बैंक, ल्हासा स्थित नेपाली महावाणिज्य दूतावास, उद्योग मंत्रालय और अर्थ मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल में सिजाङ स्वायत्त क्षेत्र के वाणिज्य विभाग, वैदेशिक मामलों के कार्यालय, चीनी सीमा शुल्क तथा अन्य सरकारी निकायों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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