एक परिवार बनेगा हिन्दू समाज, तभी राष्ट्र होगा समर्थ : दत्तात्रेय होसबाले

23 Jan 2026 22:51:53
एक परिवार बनेगा हिन्दू समाज, तभी राष्ट्र होगा समर्थ :  दत्तात्रेय होसबोले


जबलपुर, 23 जनवरी (हि.स.)। सम्पूर्ण देश का हिन्दू समाज यदि एक परिवार की भावना से एकजुट होकर कार्य करे, तभी राष्ट्र समर्थ बनेगा। उक्त उद्गार मप्र के जबलपुर शहर की सुहागी बस्ती में शुक्रवार को विराट हिन्दू सम्मेलन के दाैरान मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने व्यक्त किए।

उन्‍होंने कहा कि भारत की हिन्दू संस्कृति सृष्टि की प्रत्येक वस्तु में ईश्वर का दर्शन करती है और कन्या, ज्ञान व समृद्धि की पूजा करती है। ऐसी संस्कृति में भी यदि महिलाओं एवं कन्याओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पड़ती है, तो समाज को आत्ममंथन कर सुधार की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

सरकार्यवाह ने अपने उद्बोधन में कहा कि धरती को माँ कहने वाली संस्कृति केवल हिन्दू संस्कृति है। उन्होंने वैदिक उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि अथर्ववेद में स्पष्ट रूप से कहा गया है “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः”, अर्थात् यह भूमि मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ। उन्होंने कहा कि यह भाव आधुनिक विचार नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पूर्व से हिन्दू जीवन-दर्शन का आधार रहा है।

सरकार्यवाह ने आगे कहा कि कन्या पूजन की परंपरा विश्व की किसी अन्य संस्कृति में नहीं मिलती। केवल हिन्दू संस्कृति ही ऐसी है जहाँ कन्या को देवी स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। यह परंपरा नारी सम्मान, मातृत्व और सृजनशीलता के प्रति हिन्दू समाज की गहन श्रद्धा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी महान परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक आचरण में उनके वास्तविक पालन के लिए ही हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन आवश्यक है।

इसके साथ ही उन्‍होंने सामाजिक विघटन और आपसी फूट को देश के विभाजन का कारण बताते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग विशेषकर वंचित एवं दलित समाज को सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। हिन्दू समाज और भारत ने कभी आक्रामकता का मार्ग नहीं अपनाया, परंतु राष्ट्र की रक्षा और भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए हिन्दू जागरण आवश्यक है। हिन्दू सम्मेलन किसी अन्य समाज को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को जागरूक, संगठित और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित संत गिरिशानंद महाराज ने “हिन्दू” शब्द का भावार्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो अपने आचार और विचार से हीनता का त्याग करता है वही हिन्दू कहलाता है। उन्होंने हिन्दू समाज को भगवान का विराट शरीर बताते हुए कहा कि जैसे शरीर के सभी अंग मिलकर एक देह का निर्माण करते हैं और आपस में संघर्ष नहीं करते, उसी प्रकार समाज के सभी वर्गों को मिल-जुलकर समरसता के साथ रहना चाहिए। उन्होंने निषादराज और शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि हिन्दू समाज में भेदभाव का कोई स्थान नहीं है तथा समय के साथ आई कुरीतियों को दूर करने के लिए ऐसे सम्मेलन आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. अमिता सक्सेना ने कहा कि मातृशक्ति परिवार रूपी घर को जोड़कर रखने में सीमेंट की तरह कार्य करती है। घर के बच्चों में अच्छे संस्कार और सुदृढ़ चरित्र का निर्माण मुख्यतः मातृशक्ति के माध्यम से होता है। उन्होंने समाज निर्माण में नारी की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं सम्‍मेलन की शुरुआत से पूर्व पूरे बस्ती क्षेत्र में विशाल बाइक रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं एवं नागरिकों ने सहभागिता कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरानुसार गौपूजन, तुलसी पूजन तथा कन्याओं के पूजन किया गया तथा भारत माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर पुष्प अर्पण किया गया।

मुख्य वक्ता के उद्बोधन के पश्चात उपस्थित विशाल जनसमूह ने सामूहिक रूप से भारत माता की आरती की। कार्यक्रम की समाप्ति पर सभी अतिथियों, सहभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। सभी के लिए भंडारा का वितरण किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

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