अमेरिकी कोच नताली लद्दाख में फिगर स्केटिंग के जरिए स्थानीय खेल समुदाय को कर रहीं मजबूत

23 Jan 2026 15:09:53
फिगर स्केटिंग कोच नताली फाल्सग्राफ


लेह (लद्दाख), 23 जनवरी (हि.स.)। अमेरिका की रहने वाली फिगर स्केटिंग कोच नताली फाल्सग्राफ किसी मायने में एक सच्ची लद्दाख प्रेमी हैं। साल 2018 में पहली बार जिज्ञासावश लेह-लद्दाख पहुंचीं नताली को यह पहाड़ी इलाका इतना भा गया कि तब से वह लगातार यहां आती रही हैं। आज वह अपनी फिगर स्केटिंग विशेषज्ञता के जरिए लद्दाख के बच्चों को निःस्वार्थ भाव से प्रशिक्षण देकर स्थानीय खेल समुदाय को मजबूत कर रही हैं।

इन दिनों लेह में खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 (केआईडब्ल्यूजी) का पहला चरण खेला जा रहा है और इस बार खेलों के इतिहास में पहली बार फिगर स्केटिंग को शामिल किया गया है। इस फैसले ने न केवल इस खेल को नई पहचान दी है, बल्कि नताली फाल्सग्राफ को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

नताली ने साई मीडिया के हवाले से कहा “मैंने अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय फिगर स्केटिंग में बिताया है। जब मुझे भारत में, खासकर लद्दाख में प्राकृतिक बर्फ पर स्केटिंग और आइस हॉकी के बारे में पता चला तो मैं बेहद उत्साहित हो गई। मैं प्राकृतिक बर्फ पर स्केट करना चाहती थी और उस समुदाय को देखना चाहती थी, जो आइस स्पोर्ट्स के इर्द-गिर्द बना है।”

लेह पहुंचने के बाद नताली का जुड़ाव यहां की संस्कृति और लोगों से और गहरा होता गया। उन्होंने कहा,“मैं यहां की स्केटिंग संस्कृति, लोगों के सहयोग और सीखने के जुनून से बेहद प्रभावित हुई। लद्दाख के छोटे-छोटे गांवों में सर्दियों के दौरान जमी हुई झीलों पर लोग स्केटिंग सीखते नजर आते हैं। यही जुनून मुझे बार-बार लद्दाख खींच लाता है।”

नताली वर्तमान में लद्दाख विमेंस आइस हॉकी फाउंडेशन से जुड़ी हुई हैं। वह अमेरिका में सीनियर स्तर की फिगर स्केटर रह चुकी हैं और अपने देश में व्यापक कोचिंग अनुभव रखती हैं। खास बात यह है कि लद्दाख में वह किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह सेवा भावना से बच्चों को फिगर स्केटिंग सिखा रही हैं।

खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 में फिगर स्केटिंग की दो श्रेणियों—नौसिखिया (नोविस) और एडवांस्ड—के अंतर को समझाते हुए नताली ने कहा कि एडवांस्ड स्तर पर जंप और स्पिन कहीं अधिक कठिन हो जाते हैं, जबकि नोविस स्तर पर बुनियादी तकनीकों पर जोर रहता है।

नताली का मानना है कि खेलो इंडिया के तहत फिगर स्केटिंग को शामिल करना इस खेल के लिए बेहद सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा,“यह पूरे देश में फिगर स्केटिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का स्पष्ट रास्ता दिखाने का शानदार मौका है।”

उनकी दो शिष्याएं—स्तांजिन खान्डो और तेनजिन कुंजिन (जांस्कर क्षेत्र से)—ने खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 में नौसिखिया वर्ग में पदक जीतकर इस प्रयास को और मजबूती दी है।

भारतीय प्रतिभाओं पर बात करते हुए नताली ने तारा प्रसाद का खास तौर पर जिक्र किया, जो इस समय बीजिंग में फोर कॉन्टिनेंट्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने तारा को युवा स्केटर्स के लिए एक आदर्श बताया।

लेह के नवांग दोरजे स्टोबडन स्टेडियम में मौजूद आर्टिफिशियल आइस रिंक देश का दूसरा ऐसा रिंक है, जबकि पहला देहरादून में है। नताली का मानना है कि देश में इंडोर और आर्टिफिशियल आइस रिंक्स का विकास आइस स्पोर्ट्स के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा,“आर्टिफिशियल आइस खिलाड़ियों को सालभर अभ्यास का मौका देता है। यह भारत में फिगर स्केटिंग समुदाय को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।”

नताली फाल्सग्राफ की यह निःस्वार्थ पहल साबित करती है कि खेल सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि संस्कृतियों को जोड़ने और समुदायों को सशक्त बनाने का माध्यम भी हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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