
- केरल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: फिजियोथेरेपिस्टों के अधिकारों को मिली कानूनी मान्यता
नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। केरल हाईकोर्ट ने फिजियोथेरेपिस्टों के हक में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह फैसला भारतीय फिजियोथेरेपी एसोसिएशन (आई एपी) के पक्ष में आया है, जो इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन द्वारा दायर याचिका के खिलाफ था। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब योग्य फिजियोथेरेपिस्ट “डॉ” उपसर्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं और वे बिना किसी अनावश्यक रोक-टोक के स्वतंत्र रूप से इलाज करने के लिए अधिकृत हैं।
अदालत ने साफ किया कि फिजियोथेरेपी एक वैज्ञानिक, प्रमाण-आधारित और स्वतंत्र स्वास्थ्य पेशा है। आई एपी के अध्यक्ष प्रो. डॉ संजीव के. झा ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे भारत में फिजियोथेरेपिस्टों की पेशेवर पहचान, स्वायत्तता और सम्मान को कानूनी मान्यता मिली है। अदालत ने आई एपीएम आर की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। यह फैसला देशभर के लाखों फिजियोथेरेपिस्टों और छात्रों के लिए बड़ी राहत है।
उन्होंने मीडिया को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में अहम भूमिका निभाते हैं। बीमारी की रोकथाम, इलाज और शारीरिक क्षमता को वापस लाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
प्रो. डॉ झा ने कहा कि यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि पूरी फिजियोथेरेपी बिरादरी की सामूहिक जीत है। इससे मरीजों को बेहतर और आसान इलाज मिलेगा, नैतिक और स्वतंत्र प्रैक्टिस को बढ़ावा मिलेगा, और शिक्षा व शोध को भी मजबूती मिलेगी।
भारतीय फिजियोथेरेपी एसोसिएशन ने इस फैसले को भारत में फिजियोथेरेपी के इतिहास का एक अहम पड़ाव बताया है। संगठन ने एनसीएएचपी देशभर के फिजियोथेरेपिस्टों, शिक्षकों, छात्रों और सभी समर्थकों का धन्यवाद किया, जिन्होंने इस संघर्ष में एकजुट होकर साथ दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी