देश के धर्मगुरु आपसी मतभेद छोड़ बंग्लादेश के हिन्दुओं की रक्षा करने का करें काम : अधोक्षजानंद देवतीर्थ

24 Jan 2026 23:18:53
शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज  का छाया चित्र


संगम की रेती पर बंग्लादेश के हिन्दुओं की रक्षा के लिए किए गए वैदिक अनुष्ठान का छाया चित्र


प्रयागराज, 24 जनवरी (हि.स.)। गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने देश के धर्मगुरुओं से अपील की है कि आपसी मतभेद छोड़ दें, हांथी, घोड़ा एवं पालकी का मोह छोड़कर बंग्लादेश में सताए जा रहे वहां के हिन्दुओं की रक्षा के लिए काम करें। वे शनिवार को प्रयागराज माघ मेला में त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में बंग्लादेश के हिन्दुओं की रक्षा के लिए विशेष वैदिक अनुष्ठान एवं महायज्ञ के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने कहा कि बंग्लादेश के हिन्दू की जान-माल संकट में है। इनके कष्ट निवारण के लिए आज वैदिक महायज्ञ का अनुष्ठान किया गया। मेरी देश के धर्मगुरुओं से अपील है कि आपसी मतभेद की बातों में न उलझकर सनातन धर्मावलम्बीयों की सुरक्षा के लिए विश्व भर में फैले हिंदू एवं बंग्लादेश के सवा करोड़ के हिन्दुओं की रक्षा के लिए एक मत होकर काम करें। आज वहां के हिंदू घरों के अन्दर एवं बाहर, सड़कों पर सुरक्षित नहीं है, उनकी हत्या की जा रही है और उन्हें उल्टा लटकाकर मारा पीटा जा रहा है। हम सभी धर्मगुरुओं को एक मत होकर उनकी रक्षा करने के लिए जो भी हो सके, करना चाहिए और चिंतन एवं मनन करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह अपनी समस्त राजनीतिक शक्तियों का प्रयोग कर बंग्लादेश में सताए जा रहे हिंदुओं की रक्षा के लिए दबाव बनाना चाहिए ताकि उनकी रक्षा हो सके। लगभग 70-75 वर्ष हो गए हैं जब पाकिस्तान एवं बंग्लादेश विभाजित बने। बांग्लादेश के हिन्दु लम्बा अवधि से विधर्मियों द्वारा तरह तरह से प्रताड़ित एवं सताए जा रहे हैं, इसके बावजूद वह सनातन के प्रति वफादार बने हुए हैं। वहां आज भी सात शक्ति पीठ और सैकड़ों मठ, मंदिर एवं धार्मिक स्थल सुरक्षित है। यह सबकुछ 2023 में जाकर खुद देखा हूं। वहां पहुंचने के बाद मेरा धर्मगुरु और शंकराचार्य के रूप आदर सम्मान किया गया। बांग्लादेश के हिन्दुओं को पता है कि लगभग 135 वर्ष बाद कोई शंकराचार्य वहां पहुंचा है। यह सबकुछ आद्यशंकराचार्य की तपस्या और सनातन के लिए त्याग का परिणाम है। बांग्लादेश के हिन्दुओं ने मेरा दिल खोलकर स्वागत किया। उनके अंदर और सम्मान से यह प्रतीत होता है कि वह कितना सनातन के प्रति वफादार हैं।

शंकराचार्य ने कहा कि भारत सरकार से अपील है कि हिन्दुओं को सुरक्षा व्यवस्था दे, जो हिंदू वहां से यहां आना चाहते हैं, उन्हें सम्मान देने के साथ ही नागरिकता प्रदान की जाए। अनुयायियों से कहना चाहता हूं कि महान त्याग कर अदेतवादी गुरु दार्शनिक गुरु ने अपने ज्ञान व तपस्या के बल पर पूरे विश्व में सनातन की पताका फहराई और विश्व को एक सूत्र में पिरोव दिया और अखंड भारत का निर्णय किया। ऐसे में सभी धर्मगुरुओं से अपील है कि सभी एक जुट होकर सनातन की धर्मध्वजा लहराएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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