
- संघ के सरकार्यवाह ने युवा व्यवसायी सम्मेलन को किया संबोधित
वाराणसी, 24 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ का लक्ष्य भारत को वैभव के शिखर पर पहुंचाना है। यह शिखर भौतिक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ तो होगा ही परंतु आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी मजबूती आवश्यक है। वे बतौर मुख्यातिथि संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के तहत शनिवार शाम एक निजी स्कूल समूह में आयोजित युवा व्यवसायी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
सरकार्यवाह ने कहा कि भारतीय उद्योग में तकनीकी के साथ रोजगार सृजन आवश्यक है, लेकिन हर हाथ को काम भी मिलना चाहिए। इस तरह वर्तमान परिवेश में उद्योगों की जी.डी.पी. बढ़ाना है, परंतु सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का ध्यान रखना आवश्यक है। व्यवसाय को सुदृढ़ करने के लिए गांव से पलायन अनिवार्य नहीं है। व्यवसाय के साथ राष्ट्र धर्म, समाज धर्म का भी पालन हो।
भारत में आयोजित जी-20 सम्मेलन का उल्लेख कर सरकार्यवाह ने कहा कि इस सम्मेलन का घोष वाक्य था एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य। वास्तव में यह उक्ति भारत की प्राचीन काल से आत्मा रही है, हमने इसी दृष्टि से देखा और ऐसा ही व्यवहार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में किया है। एंगस मेडिसन नामक पश्चिमी विद्वान ने अध्ययन से निष्कर्ष निकाला कि बाहरी आक्रमणकारियों के आने से पूर्व भारत की आर्थिक स्थिति दुनिया में 23 फीसदी हिस्सेदारी रखती थी।
युवा व्यापारियों के चरित्र संबंधी गुणों की चर्चा करते हुए सरकार्यवाह ने कहा कि संघ ने राष्ट्रीय चरित्र तथा व्यक्तिगत चरित्र विकसित करने का प्रयास किया है। राष्ट्रीय धर्म को निभाने के लिए युग धर्म को देखना होगा। देश के पराभव काल में मनुष्य का धर्म अलग था तब भामाशाह जैसे व्यक्ति महाराणा प्रताप को दान देते हैं, यही राष्ट्रीय चरित्र है।
सामाजिक समरसता का जिक्र कर उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी खिलाड़ी के मेडल लाने पर हम उसकी जाति नहीं देखते, सीमा पर किसी सैनिक के बलिदान होने पर हम उसकी जाति नहीं देखते। सामान्य जीवन में भी हमें यही भावना दिखानी होगी। राष्ट्र है तो हम हैं, समाज है तो हम हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी भावना को युवा व्यवसायियों में जागृत करने का प्रयास करता है। भारत में रोजगार को बढ़ाने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की सहभागिता भी आवश्यक है। हमें अपने देश की शिक्षा, अर्थ, न्याय, प्रशासन के क्षेत्र में भी परिवर्तन करना होगा। सरकार से आवश्यक बातों की मांग करना हमारा अधिकार है, पर समाज के सुशिक्षित लोगों को अपने आत्म बल से कार्य को आगे बढ़ाना होगा। समाज की चेतना केवल मीडिया के मध्य चर्चा का विषय ना होकर हमारे कार्यों में दिखनी चाहिए। भारत के बदलते चित्र में कौन सा रंग भरना है, यह युवा व्यवसायियों पर निर्भर करता है। हमारा समाज चेतना युक्त, सकारात्मक चिंतन युक्त होना चाहिए। सज्जन शक्ति को एक साथ जोड़ने का प्रयत्न सतत् चलना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून के भरोसे ना होकर सामाजिक नैतिकता के द्वारा होनी चाहिए। मतांतरण, राष्ट्र विरोधी हिंसा फैलाने वाली शक्तियों के विरुद्ध समाज को जागृत होना होगा।
मंच पर काशी विभाग के सह विभाग संघचालक त्रिलोक उपस्थित रहे। एकल गीत साहिल ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विषय स्थापना तथा संचालन विभाग कार्यवाह राजेश ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त हिन्दू स्वयंसेवक संघ अमेरिका के राष्ट्रीय सह कार्यवाह संजय त्रिपाठी, स्कूल समूह के दीपक मधोक, हर्ष मधोक, व्यापार मण्डल अध्यक्ष संजीव सिंह, महामंत्री प्रतीक गुप्ता, राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी