मध्य प्रदेश की चार विभूतियों को मिला देश का प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' पुरस्कार, प्रदेश को बढ़ा गौरव

युगवार्ता    25-Jan-2026
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नारायण व्यास, मोहन नागर, कैलाश चंद्र पंत, भगवानदास रैकवार


भोपाल, 25 जनवरी (हि.स.)। गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर रव‍िवार को भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। इस सूची में शामिल पुरस्कार पाने वालों में 4 हस्तियां मध्‍य प्रदेश से है, जिन्हें 'पद्मश्री' पुस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह प्रदेश के लिए बहुत ही गौरव का दिन है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साल 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई। इस वर्ष कुल 131 हस्तियों को विभिन्न श्रेणियों में पद्म अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। इस सूची में मध्य प्रदेश की चार प्रमुख हस्तियों ने अपनी जगह बनाई है। भोपाल के प्रख्यात लेखक कैलाश चंद्र पंत, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, सागर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के मार्शल आर्ट खिलाड़ी भगवानदास रैकवार और पुरातत्व क्षेत्र से जुड़े नारायण व्यास को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। क्षेत्रवार देखें तो भगवान दास रैकवार को खेल, कैलाश चंद्र पंत को साहित्य एवं शिक्षा, मोहन नागर को समाज सेवा और नारायण व्यास को पुरातत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए चुना गया है। यह सम्मान प्रदेश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

कैलाश चंद्र पंत

89 वर्षीय कैलाश चंद्र पंत हिंदी भाषा, साहित्य और राष्ट्रभाषा के प्रचार-प्रसार में दशकों से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका जन्म 26 अप्रैल 1936 को मध्य प्रदेश के महू (इंदौर के समीप) में हुआ, जबकि उनका पैतृक गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खन्तोली है। पंत जी ने नौकरी के बजाय स्वतंत्र पत्रकारिता का मार्ग चुना और अपनी खुद की प्रेस की स्थापना की। उन्होंने साप्ताहिक पत्र ‘जनधर्म’ का करीब 22 वर्षों तक नियमित प्रकाशन किया, जो सामाजिक जागरूकता और वैचारिक विमर्श का सशक्त मंच बना। साहित्य, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्तमान में भी वे राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में सक्रिय हैं। उनके सतत कार्य और समर्पण के लिए उन्हें समय-समय पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

मोहन नागर

राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव (पचोर क्षेत्र) से ताल्लुक रखने वाले मोहन नागर पिछले तीन दशकों से सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे लंबे समय तक बैतूल स्थित भारत भारती शिक्षा संस्थान से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद में उपाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न जिलों में जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और सामाजिक चेतना से जुड़े कई नवाचारी प्रयास शुरू किए गए हैं। मोहन नागर विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जल संरचनाओं के पुनर्निर्माण, सिंचाई व्यवस्थाओं और नदी-तालाबों को पुनर्जीवित करने के कार्यों के लिए जाने जाते हैं। वॉटर और लैंड रेस्टोरेशन के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।

भगवान दास रैकवार

बुंदेलखंड की मिट्टी से जुड़े भगवानदास रैकवार को पारंपरिक बुंदेली युद्ध कला के संरक्षण, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सम्मान किया गया है। उन्होंने वर्षों तक लगातार प्रयास कर ऐसी प्राचीन मार्शल आर्ट को जीवित रखा, जो समय के साथ लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई थी। संघर्षों से भरे जीवन में ग्रामीण पृष्ठभूमि से आगे बढ़ते हुए भगवानदास रैकवार ने बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को फिर से पहचान दिलाई। तलवारबाजी, लाठी-डंडा और अन्य पारंपरिक युद्ध तकनीकों से जुड़ी इस कला को उन्होंने स्थानीय युवाओं को सिखाया, जिससे शारीरिक दक्षता के साथ-साथ क्षेत्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना भी मजबूत हुई।

नारायण व्यास

उज्जैन निवासी नारायण व्यास भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं। वे केंद्रीय पुरातत्व विभाग से अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और प्रख्यात पुरातत्वविद् स्वर्गीय डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के निकटतम शिष्यों में शामिल रहे हैं। डॉ. व्यास श्री गणेश शंकर विद्यार्थी मंडल के संरक्षक सदस्य भी हैं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं अध्ययन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। वे उज्जैन के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और विद्वान वेद पंडित अनंतलाल जी व्यास के सुपुत्र हैं। इसके साथ ही, वे उज्जैन की सबसे पुरानी टंकण शिक्षण संस्था अनंत टंकणालय से जुड़े परिवार का हिस्सा हैं, जिसने शिक्षा और बौद्धिक परंपरा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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