इराकी शिया गठबंधन ने नूरी अल-मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिए किया नामित

25 Jan 2026 01:13:53

बगदाद, 24 जनवरी (हि.स.)। इराक की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। देश की संसद में बहुमत रखने वाले शिया राजनीतिक गुटों के गठबंधन कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क ने पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी को एक बार फिर प्रधानमंत्री पद के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। इस फैसले के साथ ही इराक में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है।

गठबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि नूरी अल-मालिकी को उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और राज्य संचालन में भूमिका को देखते हुए चुना गया है। इस नामांकन के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सरकार गठन को लेकर बातचीत शुरू होने की उम्मीद है।

नई सरकार के सामने कई जटिल चुनौतियां होंगी। एक ओर उसे ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों को नियंत्रित करना होगा, जो अक्सर राज्य से अधिक अपने नेतृत्व के प्रति जवाबदेह माने जाते हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से इन मिलिशियाओं को समाप्त करने का बढ़ता दबाव भी झेलना पड़ेगा। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखना भी नई सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी।

इराकी संविधान के अनुसार संसद ने अपने पहले सत्र में 29 दिसंबर को स्पीकर और दो उपाध्यक्षों का चुनाव कर लिया था। इसके बाद संसद को 30 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चयन करना है। राष्ट्रपति नियुक्त होने के बाद सबसे बड़े संसदीय गठबंधन को सरकार गठन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

नूरी अल-मालिकी इससे पहले 2006 से 2014 तक दो कार्यकालों तक इराक के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनका कार्यकाल सांप्रदायिक हिंसा, सुन्नी और कुर्द गुटों के साथ सत्ता संघर्ष और अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों के लिए जाना जाता है। वर्ष 2014 में इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा देश के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा किए जाने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।

हालांकि, सत्ता से हटने के बावजूद अल-मालिकी इराकी राजनीति में प्रभावशाली बने रहे। वे स्टेट ऑफ लॉ गठबंधन का नेतृत्व करते हैं और ईरान समर्थित गुटों के साथ उनके करीबी संबंध माने जाते हैं। आलोचकों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में सांप्रदायिक विभाजन गहराया और आईएस के उभार को समय रहते रोका नहीं जा सका।

अब एक बार फिर नूरी अल-मालिकी की संभावित वापसी ने इराक की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में सत्ता संतुलन को लेकर अहम फैसले होने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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