परभणी के प्रोग्रेसिव किसान श्रीरंग लाड को पद्मश्री मिलने से जिले में खुशी की लहर

युगवार्ता    25-Jan-2026
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फाईल फोटो: पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित परभणी के प्रोग्रेसिव किसान श्रीरंग दादा लाड


मुंबई, 25 जनवरी (हि.स.)। परभणी जिले के जिंतूर तहसील के एक प्रोग्रेसिव किसान श्रीरंग उर्फ दादा लाड को कॉटन रिसर्च में उनके शानदार योगदान के लिए केंद्र सरकार ने 2026 का पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने की घोषणा की है। इस घोषणा से परभणी जिले में खुशी की लहर दौड गई है।

परभणी जिले के जिंतूर तहसील के एक प्रोग्रेसिव किसान श्रीरंग उर्फ दादा लाड एक आम किसान परिवार से हैं। उन्होंने श्रीरंग ने अपने अनुभव के आधार पर कॉटन का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कई नए एक्सपेरिमेंट किए। उनकी रिसर्च से बनी कॉटन की किस्मों ने प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी की है और हजारों किसानों को आर्थिक राहत दी है। इस काम की वजह से उन्हें किसानों के बीच खेती का ज्ञानी कहा जाता है। आज पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा होने के बाद दादा लाड ने खुशी जताई कि इस अवॉर्ड से लोगों तक टेक्नोलॉजी की जानकारी पहुंचेगी और लोगों को इससे फायदा होगा।

दादा लाड एक नेशनल लेवल पर जाने-माने किसान हैं जो किसानों के साथ लगातार और करीबी कॉन्टैक्ट में रहते हैं। दादा लाड की कपास टेक्नोलॉजी को उनका सबसे बड़ा योगदान माना जाता है। 2002-03 से, उन्होंने किसान-आधारित रिसर्च के जरिए कपास की फसल में प्रोडक्टिविटी कम करने वाली मोनोपोडियल शाखाओं की गहरी स्टडी की। इससे उन्होंने इन शाखाओं को जल्द से जल्द काटने का एक असरदार और साइंटिफिक तरीका डेवलप किया। टॉप ड्रेसिंग, हाई डेंसिटी प्लांटिंग, ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग की टेक्नीक अपनाकर, उन्होंने कपास की फसल के लिए एक होलिस्टिक, साइंटिफिक और फायदेमंद टेक्नोलॉजी डेवलप की। इस तरीके से, प्रोडक्टिव शाखाओं को न्यूट्रिएंट्स की सप्लाई बढ़ती है, बॉल का वजन बढ़ता है, कीड़ों का इंफेक्शन कम होता है, फसल का पीरियड कम होता है और किसानों का प्रॉफिट काफी हद तक बढ़ता है।

श्रीरंग उर्फ दादा लाड परभणी जिले के जिंतूर-देथाना इलाके के जाने-माने किसान हैं और उन्होंने भारतीय किसान संघ के महाराष्ट्र-गोवा रीजन ऑर्गेनाइजर के तौर पर भी काम किया है। कपास प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी के साथ-साथ उन्होंने पशुपालन के क्षेत्र में भी शानदार काम किया है। चार दशकों से ज़्यादा समय से, उन्होंने देसी लाल कंधारी गाय के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर और लगातार कोशिशें की हैं। उनके मार्गदर्शन की वजह से, मराठवाड़ा समेत राज्य के कई हिस्सों में किसान कपास की खेती को एक नई नजऱ से देखने लगे हैं। पद्म श्री अवॉर्ड की घोषणा के साथ ही जिंतूर तालुका समेत पूरे परभणी जिले में खुशी का माहौल है और उन्हें अलग-अलग लेवल से बधाई दी जा रही है। यह सम्मान ग्रामीण इलाकों के मेहनती किसानों की उपलब्धियों की एक नेशनल पहचान है। नागरिकों का मानना है कि यह सम्मान ग्रामीण इलाकों के मेहनती किसानों की उपलब्धियों की एक नेशनल पहचान है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

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