
नई दिल्ली, 26 जनवरी (हि.स.)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किला परिसर में भारत पर्व का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ‘भारत पर्व’ भारत की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक चेतना का सजीव उत्सव है, जिसमें संस्कृति, लोकतंत्र, सृजनशीलता और राष्ट्रीय एकता एक साथ साकार रूप में दिखाई देती है। भारत पर्व केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उन संविधानिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है, जो देश को एक सूत्र में बांधते हैं। लोक सभा अध्यक्ष ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किला परिसर में ‘भारत पर्व’ का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित तमाम लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत पर्व आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण है, जो कला, शिल्प, व्यंजन, संगीत और विचारों के माध्यम से एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके संविधान में निहित है, जो लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल मूल्यों पर आधारित है। भारत पर्व इन आदर्शों और आम नागरिकों के बीच एक सजीव सेतु का कार्य करता है तथा संस्कृति, परंपरा और सामूहिक उत्सव के माध्यम से संविधानिक मूल्यों को जनसुलभ बनाता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संस्कृति से जुडकर युवा अपनी जडों से पुनः जुडते हैं और नवाचार तथा राष्ट्रीय मूल्यों पर आधारित भविष्य का निर्माण करते हैं। भारत पर्व जैसे आयोजन पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाते हैं और हस्तशिल्प, हथकरघा तथा स्थानीय व्यंजनों के माध्यम से आजीविका सृजन कर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
ओम बिरला ने कहा कि इस उत्सव में गणतंत्र दिवस समारोह की भव्य झलक, सशस्त्र बलों की प्रेरक प्रस्तुतियां, देश के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां, रंग-बिरंगे हस्तशिल्प और हथकरघा बाजार, अखिल भारतीय व्यंजनालय तथा जीवंत लोक कला प्रस्तुतियां देखने को मिलती हैं। यह सब मिलकर भारत की बहुलतावादी पहचान को सशक्त रूप में प्रस्तुत करता है और यह दर्शाता है कि विविधता भारत की चुनौती नहीं, बल्कि उसकी सबसे बडी शक्ति है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वे भारत की जीवंत परंपराओं के संरक्षक और देश की सांस्कृतिक एवं नैतिक शक्ति के मजबूत स्तंभ हैं। उनका सृजन केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि पीढी-दर-पीढी ज्ञान, मूल्य और कौशल के हस्तांतरण का माध्यम है। भारत पर्व उन्हें सम्मान, पहचान और आजीविका का गरिमामय मंच प्रदान करता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक स्मृति का प्रतीक है। इसी स्थल से कभी स्वतंत्रता के स्वप्न ने आकार लिया था और आज यही स्थान भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास के गौरवशाली प्रदर्शन का मंच बना है। इतिहास और आधुनिकता का यह संगम देश को अपनी सभ्यतागत जडों से जुड़े रहते हुए प्रगति के पथ पर आगे बढने की प्रेरणा देता है।
सामूहिक उत्तरदायित्व पर जोर देते हुए उन्होंने लोगों से भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है, जिसे भारत पर्व जैसे आयोजन प्रभावी रूप से सुदृढ करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर