सरकार का साल 2032 तक 3-नैनोमीटर चिप बनाने का लक्ष्य: अश्विनी वैष्णव

27 Jan 2026 16:30:53
नई दिल्‍ली में सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम में प्रेस को संबोधित करते अश्विनी वैष्णव


नई दिल्‍ली, 27 जनवरी (हि.स)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि सरकार का साल 2032 तक आधुनिक स्मार्टफोन और कंप्यूटर जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले 3-नैनोमीटर नोड के उच्च तकनीक वाले छोटे चिप बनाने का लक्ष्य है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने राष्‍ट्रीय राजधानी नई दिल्‍ली में सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम की डिजाइन आधारित प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के तहत मंजूर की गई 24 सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन कंपनियों के साथ बैठक के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेस में यह बात कही।

अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद कहा, ‘साल 2032 तक हमारा लक्ष्य 3-नैनोमीटर चिप के डिजाइन और विनिर्माण के स्तर तक पहुंचना है। डिजाइन का काम तो हम आज भी कर रहे हैं लेकिन विनिर्माण के स्तर पर 3-नैनोमीटर तक पहुंचना होगा।’ उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र को इन छह प्रकार के चिप के किसी न किसी संयोजन की जरूरत होगी।

उन्‍होंने कहा कि डिजाइन आधारित प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के दूसरे चरण के तहत सरकार चिप की छह श्रेणियों कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ), नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी पर ध्यान केंद्रित करेगी। इससे देश की कंपनियों को 70-75 फीसदी प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास पर प्रमुख नियंत्रण मिल सकेगा। वैष्णव ने कहा कि सरकार छह प्रमुख प्रणालियों पर ध्यान देना चाहती है ताकि देश के पूरे सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र समग्र और व्यापक रूप से विकसित किया जा सके।

उन्होंने कहा, वर्षों से सपना था कि भारत की कंपनियां सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन करें और भारत में सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन हो। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में 10 परियोजना निर्माण में हैं, जबकि 4 प्रोजेक्‍ट में इस साल उत्‍पादन शुरू करेंगे। वैष्णव ने कहा कि 24 स्टार्टअप ने सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन किए हैं और 67 हजार छात्रों ने सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन की ट्रेनिंग ली है।

मंत्री ने कहा, ‘कंप्यूटर, आरएफ, नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी इन छह प्रमुख श्रेणियों में हम शिक्षा जगत और उद्योग को नए विचार, नई सोच और नए समाधान लेकर आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। उन्‍होंने कहा कि जैसे-जैसे हम 2029 की ओर बढ़ेंगे, देश में ऐसे चिप के डिजाइन और विनिर्माण की बड़ी क्षमता विकसित हो जाएगी, जिनकी जरूरत हमारे देश में लगभग 70–75 फीसदी अनुप्रयोगों में होती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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