दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने को ऊर्जा संक्रमण में निरंतर हो निवेशः हरदीप पुरी

युगवार्ता    27-Jan-2026
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भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 के शुभारंभ के अवसर पर हरदीप सिंह पुरी और अन्‍य


गोवा/नई दिल्‍ली, 27 जनवरी (हि.स)। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा, किफायत और दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा संक्रमण में निरंतर निवेश होना चाहिए। पुरी ने भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 के शुभारंभ के अवसर पर अपने संबोधन में यह बात कही।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि गोवा में आयोजित भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 का शुभारंभ संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री और एडीएनओसी के प्रबंध निदेशक और समूह सीईओ सुल्तान अहमद अल जाबेर के मुख्य भाषणों और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के स्वागत भाषण के साथ हुआ।

मंत्रालय के मुताबिक कार्यक्रम में वक्ताओं ने ऊर्जा संबंधी विषय पर संवाद को कार्यान्वयन में परिवर्तित करने और महत्वाकांक्षा को परिणामों में बदलने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में इस वैश्विक सम्मेलन की भूमिका दोहरायी। भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 के उद्घाटन भाषणों में वैश्विक स्तर पर व्यावहारिक, विस्तार योग्य और समावेशी समाधान प्रस्तुत करने वाले अग्रणी और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में भारत की स्थिति को रेखांकित किया गया। साथ ही, इस दौरान वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को गति देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार और निवेश जुटाने पर विशेष रूप से बल दिया गया।

पुरी ने अपने मुख्य भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और जलवायु के संबंध में न्यायसंगत दृष्टिकोण की दिशा में भारत की ठोस और सुदृढ़ प्रगति पर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा सप्ताह तेजी से ऐसे विश्वसनीय वैश्विक मंच के रूप में विकसित हुआ है जो वैश्विक ऊर्जा प्रणाली में अभूतपूर्व परिवर्तन और अस्थिरता के दौर में नीति निर्माताओं, उत्पादकों, उपभोक्ताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निवेशकों को एक साथ लाता है।

हरदीप पुरी ने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण मूलतः ऊर्जा के स्रोतों और साधनों को बदलने के बजाय ऊर्जा संवर्धन से संबंधित है और उन्होंने तेल, गैस, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन, एलएनजी तथा खाना पकाने के स्वच्छ ईंधनों के क्षेत्र में निरंतर निवेश की आवश्यकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने उपलब्धता, किफायत और दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत के सुधार-आधारित दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की।

केंद्रीय मंत्री ने ऊर्जा स्रोतों के अन्वेषण के लिए बड़े तलछटी बेसिनों को खोलने, ओपन एकरेज लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (डीएसएफ) की क्रमिक बोली प्रक्रिया के साथ ही वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किये जा रहे नीतिगत सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में एलपीजी के उपयोग का तेजी से विस्तार, खाना पकाने की स्वच्छ सुविधा और ऊर्जा मिश्रण में विविधता देश की समावेशी विकास और समान ऊर्जा पहुंच के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री और एडीएनओसी के प्रबंध निदेशक और समूह सीईओ सुल्तान अहमद अल जाबेर ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की मांग बड़े पैमाने पर परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर रही है, जो उभरते बाजारों, डिजिटलीकरण और विभिन्न ऊर्जा प्रणालियों के एकीकरण से प्रेरित है। भारत इन प्रमुख रुझानों के केंद्र में है और आने वाले दशकों में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की मांग को निर्णायक रूप से बढ़ावा देगा।

डॉ. अल जाबेर ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक ऊर्जा प्रणाली के सामने सबसे बड़ा जोखिम अपर्याप्त निवेश है और उन्होंने सुरक्षा, सस्ती दर और दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा के सभी रूपों में संतुलित निवेश का आह्वान किया। उन्होंने यूएई-भारत ऊर्जा साझेदारी की गहराई को रेखांकित करते हुए भारत को कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में एडीएनओसी की भूमिका का उल्लेख किया और तेजी से बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में निश्चितता, लचीलेपन और सबके लिए महत्वपूर्ण दीर्घकालिक, विश्वास-आधारित साझेदारियों के प्रति यूएई की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. सावंत ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 एक ऐसे वैश्विक मंच के रूप में उभरा है जो विचारों को कार्यों में परिवर्तित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवा ने मेजबान राज्य के रूप में सतत विकास के लिए अपना दृष्टिकोण प्रदर्शित किया है जिसमें 2050 तक 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने का दीर्घकालिक रोडमैप भी शामिल है। उन्होंने हरित अर्थव्यवस्था और समुद्री अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने, पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने और समुद्री संसाधनों के उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग पर भी बल दिया।

उल्‍लेखनीय है कि भारत ऊर्जा सप्ताह देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है जो सरकारों का नेतृत्व करने वालों, उद्योग जगत के अधिकारियों और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाकर सुरक्षित, दीर्घकालिक और किफायती ऊर्जा के लिए भविष्य की दिशा में प्रगति को गति प्रदान करता है। आईईडब्ल्यू एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में निवेश, नीतिगत समन्वय और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है जिससे वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य का निर्माण होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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