साई खेल विज्ञान प्रभाग ने शूटिंग और तीरंदाजी के कोचों के लिए शुरू की विशेष कार्यशाला

27 Jan 2026 17:14:53
खेल सचिव एवं महानिदेशक, साई, हरि रंजन राव कार्यशाला को संबोधित करते हुए


नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के खेल विज्ञान प्रभाग ने शूटिंग और तीरंदाजी से जुड़े साई कोचों के लिए चार दिवसीय विशेष खेल विज्ञान कार्यशाला सोमवार से इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित साई खेल विज्ञान प्रभाग में शुरू की।

इस अवसर पर खेल सचिव एवं महानिदेशक, साई, हरि रंजन राव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उद्घाटन संबोधन में दैनिक प्रशिक्षण वातावरण में खेल विज्ञान के गहरे एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। राव ने कहा,“मंत्रालय और सरकार खेल विज्ञान पहलों को हर संभव समर्थन देंगे, लेकिन यह आवश्यक है कि हम सोच-समझकर निवेश करें और परिणाम देने के लिए खेल विज्ञान का सटीक उपयोग करें। खासकर उन खेलों में जहां मामूली सुधार भी पदक और भागीदारी के बीच अंतर पैदा कर सकता है, वहां खेल विज्ञान की भूमिका बेहद अहम है।”

यह कार्यशाला दिसंबर में शुरू हुई कोच सेंसिटाइजेशन कार्यशालाओं की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले हॉकी, बॉक्सिंग, कुश्ती, जूडो और एथलेटिक्स जैसे खेलों में भी इसी तरह की कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं, और अब इसमें शूटिंग व तीरंदाजी को शामिल किया गया है।

राव ने आगे कहा,“खेल विज्ञान कुशल प्रशिक्षण, चोटों की रोकथाम और खिलाड़ियों के लंबे करियर को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे खिलाड़ियों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होता है। हम देशभर में खेल विज्ञान समर्थन को और मजबूत करेंगे, इसके लिए केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और राष्ट्रीय शिविरों व उत्कृष्टता केंद्रों में एथलीट सहायता प्रणालियों को सशक्त किया जाएगा।”

इस कार्यशाला में कोचों के साथ खेल वैज्ञानिक, मेडिकल विशेषज्ञ और परफॉर्मेंस स्पेशलिस्ट एक मंच पर आए हैं, ताकि पारंपरिक कोचिंग अनुभव को वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित आधुनिक तरीकों से जोड़ा जा सके। यह पहल युवा मामले और खेल मंत्रालय के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत विभिन्न खेल श्रेणियों—कॉम्बैट, एंड्योरेंस, टीम और सटीक खेलों—में कोचों के लिए नियमित क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

साई के खेल विज्ञान प्रभाग के निदेशक-सह-प्रमुख ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने कहा,“केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और खेल सचिव लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि कोचों को खेल विज्ञान के प्रति प्रोत्साहित किया जाए, ताकि इन सिद्धांतों को रोज़मर्रा के प्रशिक्षण में लागू किया जा सके। ऐसे केंद्रित प्रयास भारत की पदक संभावनाओं को मज़बूती देंगे। हमारा दृष्टिकोण एथलीट-केंद्रित, कोच-नेतृत्व वाला और खेल विज्ञान से समर्थित है।”

सटीक खेलों के लिए आयोजित यह विशेष कार्यशाला शूटिंग और तीरंदाजी जैसे खेलों में प्रदर्शन आधारित दृष्टिकोण को मज़बूत कर रही है, जहां मामूली सुधार भी पदक तय कर सकता है। कार्यक्रम के तहत बायोमैकेनिक्स, कंडीशनिंग और स्थिरता प्रशिक्षण के जरिए पोश्चर कंट्रोल, निरंतरता और चोटों से बचाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कोचों को मूवमेंट एनालिसिस और कोर-स्टेबिलिटी आधारित कंडीशनिंग के व्यावहारिक प्रयोग भी सिखाए जा रहे हैं।

सत्रों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि कोच वैज्ञानिक सिद्धांतों को सीधे दैनिक प्रशिक्षण में उतार सकें, जिससे तकनीकी दक्षता बढ़े और चोटों का जोखिम कम हो।

कार्यशाला में फिज़ियोलॉजी, रिकवरी साइंस, खेल मनोविज्ञान और खेल चिकित्सा जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। कोचों को पोषण, हाइड्रेशन, चोट रोकथाम, योग आधारित रिकवरी और दीर्घकालिक एथलीट स्वास्थ्य पर आधारित मॉड्यूल्स के साथ-साथ एकाग्रता, दबाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन पर केंद्रित खेल मनोविज्ञान सत्रों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसके अलावा न्यूरोफीडबैक, विज़ुअलाइज़ेशन, वियरेबल टेक्नोलॉजी, डेटा ट्रैकिंग और एआई आधारित परफॉर्मेंस फीडबैक जैसे उन्नत व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से कोचों को आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिता निगरानी उपकरणों से लैस किया जा रहा है। इन सत्रों का संचालन साई इकोसिस्टम के प्रमुख विशेषज्ञ कर रहे हैं, जिनमें आईजीएससी नई दिल्ली, एनएसएससी बेंगलुरु, सोनीपत, कोलकाता, गांधीनगर और एनएसएनआईएस पटियाला के विशेषज्ञों के साथ एनआरएआई और अन्य संबद्ध संस्थानों के विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

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