सब्जी एवं स्वदेशी फसलें किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम : कुलाधिपति

युगवार्ता    28-Jan-2026
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उद्यानिकी कमिश्नर भारत सरकार डॉ प्रभात कुमार संबोधित करते हुए


कार्यक्रम में मंच पर अतिथि


- रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में चतुर्थ भारतीय उद्यानिकी शिखर सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

झांसी, 28 जनवरी (हि.स.)। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में बुधवार को चतुर्थ भारतीय उद्यानिकी शिखर सम्मेलन–सह–अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। 28 से 30 जनवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन का विषय “सतत विकास, स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुदृढ़ता हेतु स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित उद्यानिकी फसलों का संवर्धन” रखा गया है। सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्यमी और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह ने कहा कि सब्जी एवं स्वदेशी उद्यानिकी फसलें कम समय में अधिक उत्पादन देकर किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ये फसलें पोषण सुरक्षा के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के प्रति भी अधिक सहनशील हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में उद्यानिकी और मसाला फसलों की अपार संभावनाएँ हैं। गुणवत्तायुक्त बीज, प्रमाणित रोपण सामग्री और कटाई-पश्चात प्रबंधन से किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है।

उद्यानिकी आयुक्त भारत सरकार डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखकर भारतीय उद्यानिकी उत्पादों का निर्यात कई गुना बढ़ाया जा सकता है। वहीं डॉ. बलराज सिंह ने ऐसे सम्मेलनों को अनुसंधान और नवाचार की दिशा में मील का पत्थर बताया।

सम्मेलन में बागवानी अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह, उद्यानिकी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार एवं डॉ. वी.एस. तोमर को लीडरशिप अवार्ड प्रदान किया गया। लाइफटाइम अचीवमेंट सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार भी वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को दिए गए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्तिका सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सोमदत्त ने प्रस्तुत किया।

300 से अधिक प्रतिभागी, 7 पुस्तकों का विमोचन

सम्मेलन में 8 देशों और भारत के 20 राज्यों से 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। इस दौरान उद्यानिकी, कृषि और वानिकी विषयक सात पुस्तकों का विमोचन किया गया।इनमें संरक्षित उद्यानिकी के सिद्धांत एवं व्यवहार, उद्यानिकी फसलों के सुधार में, प्रगति, उन्नत वृद्धि एवं उत्पादन को रणनीतियां, कृषि वानिकी में वृक्ष विविधता, अर्द्धशुष्क क्षेत्रों के लिए प्रजातियां, औद्योगिक कृषि वानिकी की संभावनाओं पर सफलता गाथा, बुंदेलखण्ड क्षेत्र में कृषि वानिकी एवं रोपण वृक्षों को उच्च तकनीक नर्सरी की स्थापना पर सफलता गाथा, वन जैव विविधता, अनुसंधान एवं संस्कृति का संक्षिप्त परिचय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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