पाकिस्तान: बलूचिस्तान में सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर मानवाधिकार आयोग की कड़ी आपत्ति

29 Jan 2026 21:55:53

क्वेटा, 29 जनवरी (हि.स.)। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने बलूचिस्तान में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें उठा रहे सरकारी कर्मचारियों की हिरासत की कड़ी निंदा की है। आयोग ने बलूचिस्तान ग्रैंड अलायंस के नेताओं और सदस्यों को तुरंत रिहा करने की मांग की है, जिन्हें कथित तौर पर मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (एमपीओ) कानून के तहत माच जेल भेजा गया है।

एचआरसीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि वेतन और भत्तों से जुड़ी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने वाले कर्मचारियों को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों और मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। आयोग ने जेलों में कथित अमानवीय हालात, भोजन और चिकित्सा सुविधा की कमी तथा अत्यधिक ठंड में कैद रखने की खबरों पर गंभीर चिंता जताई और इसे अमानवीय व अपमानजनक व्यवहार करार दिया।

यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब बलूचिस्तान एम्प्लॉइज ग्रैंड अलायंस (बीईजीए) के कर्मचारियों ने क्वेटा और खुज़दार में रैलियां निकालकर डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस समेत अन्य मांगें उठाईं। क्वेटा में प्रदर्शनकारियों ने सिटी पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया, जहां 11 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी।

इससे पहले 20 जनवरी को रेड जोन में धरने के दौरान दर्जनों कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई थीं। लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों से कई सरकारी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हुआ है। मानवाधिकार आयोग ने सरकार से अपील की है कि वह दमन की बजाय संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान करे।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

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