अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वदेशी एवं कम उपयोगी उद्यानिकी फसलों पर मंथन

युगवार्ता    29-Jan-2026
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सम्मानित होते अतिथि


कृषि विश्वविद्यालय के बाहर जुटे देश- विदेश के विद्वान


- स्मार्ट तकनीकों को बताया किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम

झांसी, 29 जनवरी (हि.स.)। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी तथा बागवानी अनुसंधान एवं विकास समिति, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चतुर्थ भारतीय उद्यानिकी शिखर बैठक सह– अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन स्वदेशी एवं कम उपयोग में आने वाली उद्यानिकी फसलों के सतत् विकास को लेकर व्यापक और गहन विचार–विमर्श किया गया। देश–विदेश से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं विषय–विशेषज्ञों ने फसल विविधीकरण, ऊर्ध्व खेती, स्मार्ट कृषि, मृदा–रहित उत्पादन प्रणालियों तथा नवाचार आधारित तकनीकों को किसानों की आय वृद्धि और क्षेत्रीय विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

दिनभर चले तकनीकी सत्रों में कटाई उपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा कृषि–निर्यात की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने प्याज, लहसुन, ड्रैगन फ्रूट, आलू, शकरकंद, टमाटर, मिर्च, पुष्पोत्पादन एवं औषधीय पौधों से जुड़े प्रसंस्करण और विपणन अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकें किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उचित मूल्य सुनिश्चित करने में सहायक होंगी। साथ ही गुणवत्तायुक्त बीज, स्वच्छ रोपण सामग्री और उन्नत नर्सरी तकनीकों को उद्यानिकी विकास की मजबूत आधारशिला बताया गया।

दोपहर बाद आयोजित सत्रों में संरक्षित खेती, सटीक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकें, एक्वापोनिक्स, आईओटी आधारित बाग प्रबंधन तथा रोग एवं कीट प्रबंधन की उन्नत रणनीतियों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के मद्देनज़र जलवायु–स्मार्ट फसलें, डिजिटल निर्णय–सहायक प्रणालियाँ, कृषि–वानिकी, हॉर्टी–पाश्चर एवं एकीकृत कृषि मॉडल को भविष्य की उद्यानिकी के लिए आवश्यक बताया गया। द्वितीय दिवस पर आयोजित पोस्टर प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने अपने नवीन शोध कार्य प्रस्तुत किए।

तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता पूर्व निदेशक आईसीएआर–सीआईएसएच, लखनऊ डॉ. शैलेन्द्र राजन, पूर्व निदेशक आईसीएआर डॉ. एस. के. शर्मा, पूर्व अध्यक्ष सब्जी विज्ञान प्रभाग आईसीएआर–आईएआरआई डॉ. बी. एस. तोमर, पूर्व कुलपति एसकेएनएयू जोबनेर डॉ. बलराज सिंह, पूर्व कुलपति डॉ. वाई.एस.आर. उद्यानिकी विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश डॉ. टी. जनकीराम तथा पूर्व निदेशक आईसीएआर–सीआईएएच बीकानेर डॉ. पी. एल. सरोज ने की।

सायंकालीन सत्र में ऑस्ट्रेलिया, रूस, चिली, उज्बेकिस्तान, ईरान एवं अमेरिका सहित विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने ऑनलाइन व्याख्यान प्रस्तुत किए, इससे सम्मेलन की वैश्विक पहचान और अधिक सुदृढ़ हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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