बलोच नेताओं ने नाटो सदस्य देशों को लिखा पत्र, पाकिस्तान, ईरान पर लगाया अस्थिरता, आतंक फैलाने का आरोप

04 Jan 2026 22:05:53
Baloch leader writes a letter to Nato Countries


Baloch leader writes letter to Nato Countries


ब्रुसेल्स, 04 जनवरी (हि.स.) पाकिस्तान से आज़ादी के लिए संघर्षरत बलोच मुक्ति आंदोलन के नेताओं ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों से संपर्क साधा है और पाकिस्तान एवं ईरान की सरकारों पर अवैध कब्ज़े, लोकतांत्रिक मूल्यों के क्रूर दमन और मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव किया है कि यदि एक स्वतंत्र बलोचिस्तान राष्ट्र अस्तित्व में आता है तो वह नाटो में आतंकवाद-विरोधी साझीदार बन कर वैश्विक सुरक्षा को मजबूत कर सकता है।

फ्री बलोचिस्तान मूवमेंट के प्रतिनिधि मीर यार बलोच ने नाटो के सदस्यों को संबोधित एक पत्र में पाकिस्तान और ईरान के खिलाफ बलोचिस्तान पर कब्जे, मानवाधिकार उल्लंघन और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। ब्रुसेल्स स्थित नाटो मुख्यालय को लिखे इस पत्र में दावा किया गया है कि एक स्वतंत्र बलोचिस्तान नाटो के लिए आतंकवाद-विरोधी साझीदार बन सकता है और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत कर सकता है। बलोचिस्तान पश्चिमी, मध्य एवं दक्षिण एशिया के बीच नाटो का सदस्य बन सकता है और संसाधनों के उपयोग को सुलभ कर सकता है।

मीर यार बलोच ने पत्र में कहा कि बलोचिस्तान दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और मध्य एशिया को जोड़ने वाली रणनीतिक भूमि है, जिसकी अरब सागर की लंबी तट रेखा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा मार्गों का केंद्र है। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्य गिनाते हुए बताया कि 1947 से पहले बलोचिस्तान संप्रभु देश था, लेकिन 28 मार्च 1948 को पाकिस्तान ने सैन्य आक्रमण से इसका बलपूर्वक विलय कर लिया, जो 6 करोड़ बलोचों की सहमति के बिना हुआ।

पत्र में आरोप लगाया गया कि पाकिस्तान और ईरान ने क्षेत्र में कट्टरवाद को बढ़ावा दिया है। पाकिस्तान की आईएसआई और सेना के कथित समर्थन से चरमपंथी समूहों ने यूरोपीय राजधानियों में हमले किए, जिससे दक्षिण-पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैली।

बलोच नेता ने पाकिस्तान के आईएसपीआर महानिदेशक और बलोचिस्तान पुलिस महानिरीक्षक के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि 2025 में ही 78,000 सुरक्षा अभियान चलाए गए, जो जातीय सफाया और नरसंहार की ओर इशारा करते हैं।

पत्र में ईरान पर भी बलोचों को नशीली दवाओं के झूठे मामलों में फाँसी देने का आरोप लगाया गया, जो सीमा पार दमन का पैटर्न दर्शाता है। पत्र में पाकिस्तान, चीन, ईरान और तुर्किये के बीच दुर्लभ खनिजों के ट्रिलियन डॉलर के शोषण का जिक्र है, जिसके राजस्व से कथित रूप से छद्म युद्ध चलाए जा रहे हैं।

पाकिस्तान की लंबी दूरी की मिसाइलें और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के कथित परमाणु हमले वाले बयानों पर चिंता जताई गई। चीन द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को एआई और उन्नत तकनीकों में 2 लाख प्रशिक्षण पहलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि बिना पारदर्शिता के ये परमाणु वातावरण में खतरा बढ़ा रही हैं।

पत्र में कहा गया कि बलोचों का आक्रमण का इतिहास नहीं है। उन्होंने विश्व युद्धों में भाग नहीं लिया। एक स्व-शासित बलोचिस्तान कट्टरवाद का मुकाबला कर सकता है और नाटो के साथ साझीदारी में समुद्री मार्गों तथा खनिज आपूर्ति को सुरक्षित बना सकता है। नाटो से संसदीय सुनवाई और नीति चर्चाओं की मांग की गई है।

पत्र की प्रतिलिपि 32 नाटो देशों के विदेश मंत्रालयों को भेजी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार/पवन कुमार

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया

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