केंद्रीय मंत्री का विपक्ष पर कटाक्ष- व्यवस्था को बाधित करने की राजनीति देशहित में नहीं

10 Oct 2026 18:15:53
jodhpur


जोधपुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक ‘परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे’ के माध्यम से धर्म, मर्यादा और व्यवस्था की रक्षा का संदेश देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि न्याय, कर्तव्य, लोककल्याण और व्यवस्था की रक्षा भी है।

शेखावत ने शनिवार काे एक बयान में कहा कि जब महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षस विघ्न डालने लगे, तब भगवान श्रीराम ने आगे बढक़र धर्म की रक्षा की। यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि जब कोई शक्ति व्यवस्था और लोककल्याण के मार्ग में बाधा बनती है, तब उसका दृढ़ता से सामना करना आवश्यक हो जाता है। धर्म की रक्षा का अर्थ अन्याय और अव्यवस्था के सामने समर्पण करना नहीं, बल्कि मर्यादा और कर्तव्य के साथ उनका प्रतिकार करना है। राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीति पर निशाना साधते हुए शेखावत ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है।

राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर व्यवस्था को बाधित करने और जनादेश की अवहेलना करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हो सकती। विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करना नहीं, बल्कि जनता के सामने वैकल्पिक नीतियां और समाधान प्रस्तुत करना भी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से ऊपर जनता का निर्णय होता है। देश की जनता विकास, सुशासन और स्थिरता चाहती है। राजनीति का केंद्र राष्ट्रहित और जनकल्याण होना चाहिए, न कि हर विषय पर टकराव की स्थिति पैदा करना।

विपक्ष की नकारात्मक राजनीति पर कटाक्ष करते हुए शेखावत ने कहा कि देश को ऐसी राजनीतिक संस्कृति की आवश्यकता है, जिसमें विचारों का संघर्ष हो, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता न हो, मतभेद हों, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनादेश के प्रति सम्मान भी बना रहे। केवल विरोध के लिए विरोध करने से न देश का भला होता है और न जनता की समस्याओं का समाधान निकलता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति का संदेश स्पष्ट है, धर्म की स्थापना, अन्याय का प्रतिकार और लोककल्याण के लिए कर्तव्यपालन। इसी भावना के अनुरूप लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। जनता का विश्वास और जनादेश ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है और उसका सम्मान करना हर राजनीतिक दल का दायित्व है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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