तेहरान, 12 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है। ईरान ने कहा है कि क्षेत्र में एक-दूसरे से जुड़े संघर्षों का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि राजनीतिक संवाद से ही संभव है। यह पहल सऊदी अरब पर हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद सामने आई है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत के दौरान यह प्रस्ताव दिया। अराघची के कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया पर जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि सैन्य दृष्टिकोण पर जोर देने और राजनीतिक समाधान की अनदेखी करने से मौजूदा स्थिति और जटिल हो जाएगी। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराने के लिए हरसंभव सहायता देने की पेशकश की।
सऊदी सरकार ने दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत की पुष्टि की, हालांकि उसके बयान में ईरान की मध्यस्थता संबंधी पेशकश का उल्लेख नहीं किया गया।
उल्लेखनीय है कि हूती विद्रोही 2014 से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिसे सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। वर्ष 2022 में हुआ संघर्षविराम हाल के महीनों में कमजोर पड़ गया है। सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष सितंबर में उस समय तेज हो गया, जब हूती बलों ने यमन के लाल सागर तट के कुछ इलाकों पर कब्जा कर लिया। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग और सऊदी तेल निर्यात के प्रमुख रास्ते के निकट है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय