हिन्दू पर मुसीबत आए तो घर से निकलना, छत पर खड़े मत रहना : पं. धीरेंद्र शास्त्री

13 Oct 2026 18:35:53
आशीर्वचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पं. धीरेंद्र शास्त्री


रथयात्रा के दौरान लोगों का अभिवादन करते हुए पं. धीरेंद्र शास्त्री


आशीर्वचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पं. धीरेंद्र शास्त्री


- पं. शास्त्री ने सनातन हिन्दू एकता रथयात्रा के दौरान हिंदुओं से की एकजुट रहने की अपील

भोपाल/दमोह, 13 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सनातन हिन्दू एकता रथयात्रा के तीसरे दिन मंगलवार को पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिन्दू समाज से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी हिन्दू पर संकट आए तो घरों से निकलना, छत पर खड़े मत रहना। अगर घरों में बैठे रहे, तो यह कायरता होगी। यात्रा के दौरान उनका जगह-जगह फूल बरसाकर स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं ने जात-पात मिटाने के नारे लगाए।

सनातन हिन्दू एकता रथयात्रा 3.0 की शुरुआत रविवार को बागेश्वर धाम से हुई थी। पांच दिवसीय इस यात्रा में करीब 500 किलोमीटर का सफर तय कर पांच जिलों से गुजरने का कार्यक्रम है। यात्रा के जरिए सनातन एकता, सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड का संदेश दिया जा रहा है। छतरपुर जिले के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिन्दू एकता रथयात्रा ने सोमवार को दमोह जिले में प्रवेश किया और रात हटा में विश्राम किया था।

यहां पं. धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया और दिव्य दरबार भी लगाया। मंगलवार सुबह यात्रा हटा से पटेरा, हिंडोरिया और समन्ना होते हुए दमोह पहुंची। पूरे मार्ग में जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया। यात्रा शुरू होने से पहले उन्होंने गौरीशंकर भगवान के दर्शन किए। इसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और राष्ट्रगान हुआ। कार्यक्रम में बच्चों को सनातन धर्म, हिन्दू एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े सात वचनों की शपथ दिलाई गई।

दमोह के पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित सभा आशीर्वचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां पं. शास्त्री ने सप्त संकल्पों के माध्यम से सनातन समाज को एकजुट होने का संदेश दिया। उन्होंने भगवान रामानंदाचार्य के कथन “जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई” का उल्लेख करते हुए सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठने की बात कही। सभा के दौरान उन्होंने युवतियों को संबोधित करते हुए कहा, “दुर्गा बनना, काली बनना, पर कभी ना बुर्के वाली बनना।”

यात्रा के दौरान पं. धीरेंद्र शास्त्री ने हिन्दू समाज को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि छतों पर खड़े होकर यात्रा देखने के बजाय जरूरत पड़ने पर लोगों को घरों से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने कहा, “छत पर खड़े हिंदुओं, अगर कल किसी हिन्दू पर मुसीबत आएगी, तो घर से निकलोगे या नहीं? और अगर घर से न निकले, तो तुम सबसे बड़े बुजदिल हो।” उन्होंने कहा कि रथयात्रा का मकसद राजनीति में प्रवेश करना या किसी को वोट दिलाना नहीं है। यात्रा के माध्यम से सनातन समाज में एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया जा रहा है। रथयात्रा के स्वागत में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाए। कुछ जगह जेसीबी से पुष्पवर्षा की गई। स्कूली छात्राएं कलश लेकर स्वागत के लिए खड़ी रहीं, वहीं ग्रामीणों ने फूलों से रंगोली सजाई और ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा का अभिनंदन किया।

गौरतलब है कि यात्रा के पहले दिन पं. शास्त्री ने कहा था, “चाहे जितने विरोधी आएं, प्राण चले जाएं, तो भी धर्म नहीं छोड़ना है।” उन्होंने सनातनियों की एकता को भारत की मजबूती से जोड़ते हुए समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। जबकि सोमवार को दूसरे दिन रथयात्रा पन्ना जिले के अमानगंज पहुंची थी। यहां उन्होंने कहा था कि भारत में जातिवाद नहीं, राष्ट्रवाद जरूरी है। उन्होंने हिन्दू समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए चेताया था कि समाज एकजुट नहीं हुआ, तो आने वाला समय कठिन हो सकता है।

तीसरे दिन की यात्रा में अयोध्या की हनुमानगढ़ी के राजू दास महाराज, मलूकपीठ के गंगा दास महाराज, हरिद्वार के मोनी महाराज और चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज भी पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ मौजूद रहे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला और विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया गया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

Powered By Sangraha 9.0