गोल्ड ईटीएफ एफओएफ रोक- अब कहां पैसा लगाएं निवेशक, कहां मिलेगा बंपर रिटर्न?

16 Oct 2026 13:42:53
प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हि.स.)। त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) में नए निवेश पर आज से अस्थाई रोक लगा दी गई है। इस अस्थायी रोक ने निवेशकों, विशेषकर मध्यम वर्ग के बीच कई सवाल और चिंताएं खड़ी कर दी हैं। धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले आई इस पाबंदी का सीधा असर उन आम निवेशकों पर पड़ रहा है जो सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच छोटे-छोटे निवेश के जरिए अपनी बचत को सुरक्षित करना चाह रहे थे।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि इस पाबंदी के व्यावहारिक असर को समझें तो राहत की बात ये है कि जिन निवेशकों की मासिक एसआईपी पहले से ही इन योजनाओं में सक्रिय है और नियमित रूप से उनके बैंक खातों से किश्तें कट रही हैं, उन पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनकी पुरानी एक्टिव एसआईपी बिना किसी रुकावट के पहले की तरह ही चलती रहेगी।

इस रोक का मुख्य असर उन लोगों पर होगा, जो इस त्योहारी सीजन में नया एकमुश्त निवेश करने या नए सिरे से एसआईपी रजिस्टर करने की योजना बना रहे थे। ये असर भी इसलिए होगा, क्योंकि आज से शुरू हुई अस्थाई रोक के कारण अगले आदेश तक फंड हाउस किसी भी नए आवेदन को स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा पहले से ही चालू एसआईपी में अब निवेश की राशि को बढ़ाने यानी टॉप-अप या स्टेप-अप करने की अनुमति भी नहीं होगी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड एफओएफ के तकनीकी अंतर को समझना आवश्यक हो जाता है, क्योंकि कई निवेशक इन दोनों को एक ही समझने की भूल कर बैठते हैं। मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन के अनुसार गोल्ड ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सीधे तौर पर हाजिर सोने (फिजिकल गोल्ड) के बाजार मूल्य से जुड़ा होता है। गोल्ड ईटीएफ को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट किया जाता है।

इसमें निवेश करने के लिए निवेशकों के पास एक डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट होना जरूरी होता है, क्योंकि इसकी खरीद-बिक्री ठीक उसी तरह शेयर बाजार के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर होती है जैसे किसी कंपनी के शेयरों की की जाती है। ट्रेडिंग सेशन के दौरान इसकी कीमतों में किसी भी कंपनी के शेयर की तरह ही आमतौर पर लगातार बदलाव होता रहता है और इसकी लिक्विडिटी पूरी तरह स्टॉक एक्सचेंज पर निर्भर करती है।

दूसरी ओर, गोल्ड ईटीएफ एफओएफ यानी फंड ऑफ फंड्स एक ऐसी म्यूचुअल फंड योजना है, जो सीधे सोने में निवेश न करके, बाजार में पहले से मौजूद गोल्ड ईटीएफ योजनाओं के यूनिट्स में पैसा लगाती है। तकनीकी रूप से यह उन निवेशकों के लिए तैयार किया गया है, जो डीमैट अकाउंट की झंझट से बचना चाहते हैं। इसमें निवेश करने के लिए किसी डीमैट खाते की जरूरत नहीं होती और निवेशक आम म्यूचुअल फंड की तरह अपने नियमित बैंक खाते के माध्यम से इसमें एकमुश्त या एसआईपी के जरिए पैसा लगा सकते हैं। इसकी कीमत दिन के अंत में घोषित होने वाली नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के आधार पर तय होती है। चूंकि सेबी के निर्देश के बाद आई वर्तमान रोक केवल गोल्ड ईटीएफ एफओएफ के नए सब्सक्रिप्शन पर लागू हुई है, इसलिए निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

मयंक मोहन का कहना है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) जैसी सरकारी योजना के बंद होने और गोल्ड ईटीएफ एफओएफ पर रोक लगने के बाद इस त्योहारी सीजन में निवेशकों के पास डिजिटल और सुरक्षित निवेश के लिए सबसे सटीक विकल्प खुद गोल्ड ईटीएफ ही है। चूंकि नियामक की पाबंदी केवल फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) पर है, इसलिए जिन निवेशकों के पास पहले से डीमैट खाता मौजूद है या जो नया डीमैट खाता खुलवा सकते हैं, वे सीधे स्टॉक एक्सचेंज (NSE या BSE) पर जाकर किसी भी फंड हाउस के गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्स को लाइव मार्केट में खरीद सकते हैं। इस माध्यम से निवेश करने पर शुद्धता की पूरी गारंटी रहती है और नॉर्मल ट्रेडिंग टाइम में कभी भी इसे बेच कर कैश हासिल किया जा सकता है।

इसके अलावा, डिजिटल गोल्ड भी एक बेहद लोकप्रिय, सुरक्षित और सुलभ माध्यम बनकर उभरा है। विभिन्न मान्यता प्राप्त मोबाइल वॉलेट, फिनटेक ऐप्स और ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए निवेशक मात्र एक रुपये जैसी छोटी सी राशि से भी शुद्ध 24 कैरेट का डिजिटल सोना खरीद सकते हैं। इस विकल्प की सबसे बड़ी खूबी ये है कि निवेशक द्वारा खरीदे गए सोने के बराबर मूल्य का हाजिर सोना (फिजिकल गोल्ड) पूरी तरह सुरक्षित और पूरी तरह से बीमाकृत लॉकरों में रख दिया जाता है, जिससे घर में सोना रखने या चोरी होने का कोई डर नहीं रहता।

मयंक मोहन के अनुसार निवेशक अपनी सुविधानुसार जब चाहें इसे ऑनलाइन बाजार मूल्य पर बेच सकते हैं या एक निश्चित मात्रा पूरी होने पर इसे सोने के सिक्कों या आभूषणों के रूप में अपने घर पर भी डिलीवर करवा सकते हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड हाउसेज द्वारा गोल्ड ईटीएफ एफओएफ पर अस्थाई रोक के लिए उठाया गया यह कदम बाजार के आंतरिक तकनीकी और प्रबंधकीय संतुलन को बनाए रखने के लिए है। इसलिए, निवेशकों को अपनी वित्तीय योजनाओं को रोकने के बजाय डीमैट खाते के माध्यम से सीधे ईटीएफ में या फिर डिजिटल गोल्ड जैसे आधुनिक सुरक्षित माध्यमों का रुख करना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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