उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच महामंडलेश्वर के आश्रम पर चला बुलडोजर, चार मंजिला भवन जमींदोज

16 Oct 2026 23:17:53
उज्जैन में महामंडलेश्वर के आश्रम में चार मंजिला भवन को तोड़ते हुए नगर निगम की टीम


उज्जैन, 16 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने जूना अखाड़े से जुड़े हरियाणा सेवा आश्रम में बने चार मंजिला भवन को ध्वस्त कर दिया। यह आश्रम महामंडलेश्वर ज्योतिगिरी महाराज का है। करीब आठ हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने इस होटलनुमा भवन को चार पोकलेन मशीनों और एक जेसीबी की मदद से तोड़ा गया।

नगर निगम के अनुसार, भवन का निर्माण लगभग डेढ़ साल से चल रहा था। निर्माण हटाने के लिए आश्रम को दो बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद निगम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। भवन का नया हिस्सा तोड़ दिया गया, जबकि आश्रम के पुराने हिस्से को सुरक्षित रखा गया। इमारत के दूसरी ओर लगा वॉटर सॉफ्टनर भी हटाया गया।

इससे पहले सिंहस्थ की तैयारियों के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान का एक हिस्सा भी तोड़ा जा चुका है। शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के दौरान विरोध और पथराव की घटना हुई थी। खड़े हनुमान मंदिर का बाहरी ढांचा भी हटाया गया, जबकि प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया। इसके अलावा मदीना कॉलोनी, बेगम बाग और विभिन्न आश्रमों में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम की कार्रवाई

नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने बताया कि सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन पर अवैध निर्माण का यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय पहुंचा था। सुनवाई के बाद अदालत ने नगर निगम को अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद निगम की टीम ने आश्रमों में बने अनधिकृत निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। हरियाणा सेवा आश्रम में भी इसी के तहत नई इमारत को ध्वस्त किया गया, जबकि पुराने निर्माण को नहीं तोड़ा गया।

उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी ने वर्ष 2023 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर 100 से 200 मीटर के दायरे में होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों सहित कई निर्माण किए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे शिप्रा नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। मामले की सुनवाई के बाद पांच मई को उच्च न्यायालय ने नगर निगम को 15 जून तक अतिक्रमणों की सूची तैयार करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के दौरान हुआ था पथराव

गौरतलब है कि सितंबर 2026 में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई की गई थी। इस दौरान विरोध के बीच पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति संभाली। इस मामले में गिरफ्तारियां भी हुई थीं। सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों के हिस्सों को हटाने की कार्रवाई विवाद का कारण बनी थी। बाद में शाही मस्जिद प्रबंधन से जुड़े लोगों ने खुद आगे आकर प्रभावित हिस्से को हटाने का काम किया। इस दौरान मस्जिद के गुंबद और मीनार के कुछ हिस्से भी हटाए गए। यह कार्रवाई सिंहस्थ के मद्देनजर सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की योजना के तहत की गई थी।

माधवानंद आश्रम की दो मंजिला इमारत भी तोड़ी गई

करीब 25 दिन पहले नगर निगम ने लाल पुल क्षेत्र में सिंहस्थ के लिए आरक्षित जमीन पर बन रहे माधवानंद आश्रम की दो मंजिला इमारत को भी ध्वस्त किया था। लगभग 10 हजार वर्गफीट में बन रही इस इमारत को दो पोकलेन मशीनों और चार जेसीबी की मदद से तोड़ा गया था। इससे पहले 25 फरवरी 2026 को सिंहस्थ क्षेत्र में शंकराचार्य मठ और धर्मशालाओं सहित पांच संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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