(पुन: अपडेट) देश को हिंसा और अराजकता की आग में झोंकना चाहती है कांग्रेस : राजनाथ सिंह

16 Oct 2026 13:08:53
प्रेसवार्ता को संबोधित करते राजनाथ सिंह


(पुन: अपडेट - खबराें में बदलाव के साथ पुन: जारी)

लखनऊ, 16 अक्टूबर (हि.स.)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर देश में हिंसा और अराजकता का माहौल पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी पार्टी राजनीतिक पराजय का बदला देश से लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि ‘Regime Change (सत्ता परिवर्तन)’ और ‘प्रतिरोध’ जैसे नारों के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। राजनाथ सिंह शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र लखनऊ के दौरे के दूसरे दिन प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

उन्हाेंने कहा कि महात्मा गांधी का राजनीतिक उत्तराधिकारी होने का दावा करने वाली कांग्रेस ने हिंसा और अराजकता की राजनीति अपनाकर ‘गांधी’ नाम के इस्तेमाल का नैतिक आधार खो दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत में बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां पैदा करने का सपना देख रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 37 वर्षों से सत्ता से बाहर रहने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जनता अच्छी तरह समझती है कि पार्टी की राजनीतिक स्थिति के पीछे कथित वोट चोरी के आरोप हैं या उसकी कार्यशैली और कामकाज की विफलता।

राजनाथ सिंह ने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि ‘सत्ता परिवर्तन’, ‘प्रतिरोध’ और ‘संसद नहीं, सड़क से ही रास्ता निकालना है’ जैसे बयान राजनीतिक समाधान के बजाय अराजकता को बढ़ावा देने वाले हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की राजनीति भारत की विकास यात्रा को बाधित करने का निंदनीय प्रयास है।

रक्षामंत्री ने कहा कि भारत की प्रगति और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव से कई शक्तियां असहज हो सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में लगातार हार का सामना कर रहे कुछ राजनीतिक दल जाने-अनजाने में ऐसी शक्तियों के हाथों में खेल रहे हैं। उन्होंने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत अब रक्षा उत्पादों का निर्यातक देश बनकर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा, साख और विश्वसनीयता बढ़ी है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी चुनावी व्यवस्था पर संदेह नहीं किया और न ही संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “भारत का भविष्य हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। हमें टकराव नहीं, संवाद और राष्ट्र निर्माण का मार्ग चुनना चाहिए।”

रक्षामंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर ‘Politics of Disruption (व्यवधान की राजनीति)’ करने के बजाय जनमत का सम्मान करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को राजनीतिक स्वार्थों की बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। झूठे आक्रोश, संस्थाओं को बदनाम करने और राजनीतिक अवसरवाद के जरिए देश की विकास यात्रा को बाधित नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने का लाइसेंस नहीं है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘सत्ता परिवर्तन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल दर्शाता है कि कांग्रेस की लड़ाई सुधार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य देश में अराजकता पैदा करके किसी भी तरह सत्ता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि सरकार को गिराने की खुली बातें करने से विपक्ष का एजेंडा स्पष्ट होता है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना और देश में अस्थिरता पैदा करना किसी भी राजनीतिक दल का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

रक्षामंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र निर्माण के बजाय राजनीतिक टकराव के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने के प्रयासों से बचना जरूरी है।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान संवाद, तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास यात्रा मजबूत बनी रहे।

प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित पार्टी के अन्य नेता उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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