
- महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों और बड़े अधिकारियों के नाम से भी फर्जी फेसबुक आईडी
रायपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ पुलिस के ऑपरेशन साइबर शील्ड ने दो अलग-अलग मामलों में यूपी के दो शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी की कार्रवाई सोमवार को रायपुर रेंज साइबर पुलिस ने की है।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों (फेसबुक, गूगल और व्हाट्सएप डेटा) के आधार पर आरोपितों को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर और कानपुर से धर दबोचा। इनमें से एक ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव वरिष्ठ आईएएस सुबोध कुमार सिंह की फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर ठगी का जाल बुना था, तो दूसरे ने शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर एक महिला से 88 लाख रुपये ठग लिए थे।
पहले मामले में प्रार्थी सुशांत पनका ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने सीनियर आईएएस सुबोध कुमार सिंह के नाम से फेसबुक पर फर्जी आईडी बना रखी है। इस पर राखी पुलिस ने बीएनएस की धारा 319(2), 336(3) और आईटी एक्ट 66(सी ) के तहत अपराध दर्ज किया और जांच रेंज साइबर थाना रायपुर को सौंपी।पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के निर्देश पर इस पूरे अभियान को चलाया गया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आईएएस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह के नाम से अज्ञात व्यक्ति द्वारा फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाए जाने की शिकायत मिली थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए फेसबुक, गूगल और मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से डेटा मंगाकर उसका गहन तकनीकी विश्लेषण किया और सीधे आरोपी को उत्तर प्रदेश से ट्रैक करके धर दबोचा।
पुलिस अधिकारियों ने बयान में स्पष्ट किया है कि पकड़ा गया आरोपित अर्जुन कुमार जाटव अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर फर्जी आईडी बनाने और धोखाधड़ी के संगठित नेटवर्क में शामिल था। उसके मोबाइल फोन की जांच में कई अन्य महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों और बड़े अधिकारियों के नाम से भी फर्जी फेसबुक आईडी बनाए जाने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।
तकनीकी जांच में फेसबुक, गूगल और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर से मिले डाटा का एनालिसिस किया गया तो आरोपी की लोकेशन हमीरपुर निकली। इसके बाद पुलिस ने अर्जुन कुमार जाटव पिता मुन्नू कुमार, उम्र 23 साल, निवासी ग्राम पारा, तहसील मौदहा, हमीरपुर (यू पी ) को गिरफ्तार किया।
जांच में पता चला कि आरोपित अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर फर्जी आईडी का धंधा करता था। उसके मोबाइल को खंगालने पर पुलिस के होश उड़ गए – उसमें देश के कई बड़े जनप्रतिनिधियों और बड़े अफसरों की फर्जी फेसबुक आईडी के सबूत मिले हैं, जिस पर अब अलग से कार्रवाई होगी।
दूसरे मामले में प्रार्थी रश्मि शर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा दिलाने के नाम पर उनसे 88 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है। इस पर रेंज साइबर थाना रायपुर में अपराध क्रमांक 14/24, धारा 318(4), 3(5), 238, 111 बीएनएस और 66(डी ) आई टी एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ।
शेयर ट्रेडिंग ठगी मामले में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानपुर से गिरफ्तार आरोपित प्रवीण कुमार दीक्षित 'दीक्षित एजेंसी' नाम की एक फर्जी शेल कंपनी के जरिए बैंक खाते खुलवाता था। इस मुख्य आरोपित के बैंक खाते का इस्तेमाल देश भर के 11 अलग-अलग थानों और साइबर सेल में दर्ज ठगी के मामलों में भी राशि ट्रांसफर करने के लिए किया गया
बैंक खातों, मोबाइल नंबर और वॉट्सएप चैट के तकनीकी विश्लेषण से पुलिस कानपुर तक पहुंची। आरोपित प्रवीण कुमार दीक्षित पिता विद्याभूषण दीक्षित, उम्र 46 साल, पता पांडु नगर हंसनगर कानपुर (यूपी ) अपने साथी के साथ मिलकर दीक्षित एजेंसी नामक फर्जी कंपनी बनाकर बैंक अकाउंट खोलता था और ठगी की रकम उसी में मंगवाता था। पूछताछ में उसने अपने नेटवर्क के कई और नाम उगले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपित के जिस बैंक खाते का इस्तेमाल हुआ, उस पर देश के 11 अलग-अलग थानों और साइबर सेल में पहले से ही रिपोर्ट दर्ज हैं।
रेंज साइबर पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में आज जेल भेज दिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा