नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी समारोह मंगलवार को

19 Oct 2026 16:21:53
डॉ. मोहन भागवत, सरसंघचालक (फाईल फोटो)


नागपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी समारोह नागपुर के रेशिमबाग मैदान में होगा। यह समारोह मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुबह 7:40 बजे से शुरू होगा। इस समारोह में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन होगा। इस दौरान संघ की 100 वर्षों की यात्रा के आकलन के साथ भविष्य की कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को लेकर उनके विचारों पर देश की नजर रहेगी।

इस समारोह में दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और इजरायल के मुंबई स्थित महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच को भी आमंत्रित किया गया। शताब्दी वर्ष के समापन की पृष्ठभूमि में इस वर्ष का विजयादशमी समारोह विशेष महत्व है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में की थी। यही कारण है कि विजयादशमी संघ के लिए केवल एक वार्षिक परंपरा नहीं, बल्कि स्थापना दिवस के रूप में भी विशेष महत्व रखती है। इस कार्यक्रम इस कार्यक्रम के साथ ही विजयादशमी पर संघ के शताब्दी वर्ष का समापन हो जाएगा।

संघ की जन्मभूमि नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित होने वाला यह समारोह ऐतिहासिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन के विस्तार, शाखा व्यवस्था, स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण और सामाजिक क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में इस वर्ष का विजयादशमी समारोह बीते 100 वर्षों की यात्रा का आकलन करने और आने वाले समय की दिशा तय करने के लिहाज से अहम होगा।

विजयादशमी समारोह में सरसंघचालक का संबोधन प्रमुख आकर्षण रहता है। इस संबोधन के माध्यम से संघ देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इस बार सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, स्वदेशी, नागरिकों की सामाजिक जिम्मेदारी और संगठन के विस्तार जैसे विषयों पर उनके विचारों को लेकर उत्सुकता है। हालांकि, इन मुद्दों पर संघ की वास्तविक भूमिका उनके संबोधन के बाद ही स्पष्ट होगी।

शताब्दी वर्ष के समापन के साथ संघ के सामने अपनी अब तक की उपलब्धियों का आकलन करने और भविष्य की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने का अवसर भी है।

इस वर्ष का विजयादशमी समारोह केवल परंपरागत आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि संघ की आगामी रणनीति और कार्यदिशा को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉ. मोहन भागवत के संबोधन से संघ की भविष्य की योजनाओं और समकालीन राष्ट्रीय एवं सामाजिक मुद्दों पर उसके दृष्टिकोण के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी

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