कैप्टन स्मित को 'अशोक चक्र' देने की मांग, देवड़ा ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

02 Oct 2026 16:30:53
शिवसेना राज्यसभा सांसद और अधीनस्थ विधान समिति के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा (फाइल फोटो)।


नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। शिवसेना राज्यसभा सांसद और अधीनस्थ विधान समिति के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में अदम्य साहस का परिचय देकर 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर को शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार 'अशोक चक्र' से सम्मानित करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन मच्छर की असाधारण बहादुरी को औपचारिक रूप से मान्यता देने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में देवड़ा ने कहा कि मुंबई में जन्मे कैप्टन स्मित मच्छर ने हवा में उत्पन्न अप्रत्याशित और गंभीर संकट के दौरान जिस सूझबूझ और साहस का परिचय दिया, वह उनके पेशेवर दायित्वों से कहीं आगे का कर्तव्य था। उड़ान के दौरान सह-पायलट द्वारा कथित रूप से विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश के बीच कैप्टन मच्छर पर कॉकपिट में हमला किया गया और वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

देवड़ा ने पत्र में कहा कि गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छर ने हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इससे विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को स्थिति में हस्तक्षेप करने का अवसर मिला और एक बड़े विमान हादसे को टाला जा सका। कैप्टन मच्छर ने अपनी जान की परवाह किए बिना यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

देवड़ा ने पत्र में कहा कि कैप्टन मच्छर की बहादुरी की सराहना भारत के साथ वैश्विक स्तर पर भी हुई है। उन्हें औपचारिक रूप से सम्मानित करने से देश के युवाओं को यह संदेश जाएगा कि बहादुरी किसी एक पेशे या युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। कोई भी नागरिक दूसरों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश कर सकता है।

उन्होंने कहा कि एक मुंबईकर होने के नाते उन्हें कैप्टन मच्छर की बहादुरी पर विशेष गर्व है।

उल्लेखनीय है कि 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान कॉकपिट में अचानक हिंसक स्थिति पैदा हुई थी। इस दौरान भारतीय मूल के मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर कथित तौर पर हमला किया गया और उन्हें गंभीर चोटें आईं। इसी बीच सह-पायलट द्वारा कथित रूप से विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की गई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छर ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को हस्तक्षेप करने का अवसर मिला और विमान को सुरक्षित उतारा जा सका। इस घटना में विमान में सवार सभी 174 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की जान बच गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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