एशियन खेल 2026: भारतीय महिला हॉकी टीम ने खत्म किया 44 साल का सूखा, चीन को हराकर जीता स्वर्ण

02 Oct 2026 18:18:54
भारतीय महिला हॉकी टीम


-भारतीय महिला हॉकी टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफिकेशन भी हासिल किया

आइची-नागोया, 02 अक्टूबर (हि.स.)। 44 साल का इंतजार खत्म हुआ और भारतीय महिला हॉकी ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया। भारतीय महिला टीम ने फाइनल में मौजूदा एशियाई चैंपियन और विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने सीधे लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया।

भारतीय टीम के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि महिला हॉकी में भारत ने आखिरी बार 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में पदक जीता था। इसके बाद 44 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारतीय बेटियों ने फिर एशियाई खेलों के मंच पर स्वर्णिम इतिहास रचा और तिरंगा शान से लहराया।

फाइनल में भारत के लिए एकमात्र गोल लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में किया। साक्षी से मिले पास को हासिल करने के बाद लालरेमसियामी ने शानदार अंदाज में घूमकर तेज टॉमहॉक शॉट लगाया, जो चीनी गोलकीपर को छकाते हुए गोल के कोने में जा पहुंचा। यही गोल अंत तक भारत की जीत का आधार बना।

पहले क्वार्टर में बढ़त लेने के बाद भारत ने शानदार रक्षात्मक खेल दिखाया। 13वें मिनट में भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन नवनीत कौर का प्रयास गोल से थोड़ा बाहर चला गया। इसके बाद चीन ने लगातार दबाव बनाया और 19वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। भारतीय डिफेंस ने खतरे को टाल दिया।

22वें मिनट में अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार बचाव करते हुए चीन को बराबरी करने से रोक दिया। चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला था लेकिन सविता ने बाईं ओर नीचे की तरफ डाइव लगाकर शानदार सेव किया। इसके बाद शिल्पी दहिया ने भी गोललाइन के पास महत्वपूर्ण बचाव करते हुए भारत की बढ़त कायम रखी।

पहले हाफ के अंत तक भारत 1-0 से आगे था। दूसरे हाफ में चीन ने गेंद पर अपना कब्जा बढ़ाया और भारतीय डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। 33वें मिनट में चीन को लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले। भारतीय खिलाड़ियों ने गोललाइन पर शानदार बचाव किए और चीन के हर प्रयास को नाकाम किया।

नवनीत कौर ने एक बार फिर गोललाइन पर महत्वपूर्ण बचाव किया। चीन की अपील पर पेनल्टी स्ट्रोक की संभावना बनी लेकिन भारत ने रेफरल लिया और फैसले के बाद चीन को पेनल्टी कॉर्नर ही मिला। भारतीय रक्षापंक्ति ने इसके बाद भी चीन को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया।

तीसरे क्वार्टर में चीन ने लगातार आक्रमण किए। 40वें मिनट के आसपास चीन का दबदबा साफ दिखाई दिया, लेकिन भारतीय डिफेंस ने अपना संयम नहीं खोया। तीसरे क्वार्टर के अंत तक स्कोर 1-0 ही रहा।

आखिरी 15 मिनट में चीन ने बराबरी के लिए पूरी ताकत झोंक दी। अंतिम चरण में चीन ने अपना गोलकीपर भी बाहर बुलाकर एक अतिरिक्त आउटफील्ड खिलाड़ी उतारा, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने हर हमले को नाकाम कर दिया। भारत ने आखिरी मिनटों में गेंद को सुरक्षित रखते हुए समय निकाला और आखिरकार अंतिम हूटर बजते ही ऐतिहासिक जीत पर मुहर लग गई।

इस स्वर्ण के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने न केवल 44 साल बाद एशियाई खेलों में पदक जीता, बल्कि लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफिकेशन भी हासिल कर लिया। पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाने के बाद भारतीय महिला हॉकी के लिए यह वापसी बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1982 के दिल्ली एशियन खेलों में स्वर्ण जीता था।

टूर्नामेंट में भारत की ओर से सबसे ज्यादा गोल दीपिका ने किए। उन्होंने 21 गोल दागे। नवनीत कौर 10 गोल के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि चीन की जियाकी झोंग ने 9 गोल किए।

भारत की इस ऐतिहासिक जीत ने एशियाई खेलों में देश के लिए एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे

Powered By Sangraha 9.0