2030 तक वस्त्र उद्योग का कारोबार 35 करोड़ डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य: गिरिराज सिंह

02 Oct 2026 19:08:53
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के साथ अन्य लोग मौजूद।


नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि कपड़ा क्षेत्र के कारोबार को वर्ष 2030 तक 35 करोड़ डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 25 करोड़ डॉलर का घरेलू बाज़ार और 10 करोड़ डॉलर का निर्यात शामिल है।

गिरिराज सिंह ने यह बात दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘टेक्सटाइल कॉन्क्लेव के उद्घाटन पर कही। यह कार्यक्रम एमएसएमई सेक्टर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्यरत अखिल भारतीय संगठन लघु उद्योग भारती ने किया था।

गिरिराज ने कहा, टेक्सटाइल देश में सर्वाधिक रोजगार सृजन करने वाला उद्योग है। वर्ष 2014 में इस सेक्टर का आकार 138 मिलियन डॉलर का था जो मोदी सरकार के आने के बाद 19 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। अब सरकार का विजन इसे 2030 तक 35 करोड़ डॉलर के स्तर तक ले जाना है, जिसमें 25 करोड़ डॉलर का योगदान घरेलू बाजार से और 10 करोड़ डॉलर का योगदान निर्यात से हासिल करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि दुनिया भर में जारी ‘टैरिफ वार’ और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत सरकार सक्रियता से काम कर रही है। भारतीय वस्त्र उत्पादों के लिए नए अवसर तलाशते हुए सरकार ने 40 नए देशों को चिन्हित किया है, जहां व्यापार और निर्यात को तेजी से बढ़ाया जाएगा।

हथकरघा और हस्तशिल्प की पहुंच पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है। वर्तमान में देश के 548 जिलों से हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पाद सीधे 132 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के कारीगरों को सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ने का लाभ मिल रहा है।

मंत्री ने कहा कि देश में करीब 7-8 न्यू एज फाइबर के उत्पादन पर शीघ्र काम शुरू होगा जिससे विदेशों पर हमारी निर्भरता ख़त्म की जा सके। उन्होंने बैम्बू, पाइनापल और केले के फाइबर जैसे अन्य वैकल्पिक उद्योगों के साथ स्वयं सहायता ग्रुप को जोड़ने पर बल दिया।

मानव निर्मित वस्त्र अनुसंधान संघ (मंत्रा) के निदेशक डॉ. पंकज गांधी ने बताया कि तकनीकी वस्त्रों का उपयोग अब पारंपरिक परिधानों तक सीमित न रहकर कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा, ऑटोमोबाइल, निर्माण, परिवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। भारत विश्व के प्रमुख तकनीकी वस्त्र बाजारों में शामिल है और इस क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान, स्वदेशी उत्पादन तथा निर्यात विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं।

डॉ. गांधी ने तकनीकी वस्त्रों में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों एवं अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रस्तुति में अत्याधुनिक तकनीक, नए उत्पादों के विकास, आयात प्रतिस्थापन और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष प्रकाश डाला गया। इसके अलावा उन्होंने उद्योग-अकादमिक सहयोग और सीओई-टीआरए मॉडल के माध्यम से एमएसएमई को तकनीकी सहायता, परीक्षण सुविधा, उत्पाद विकास तथा व्यवसायीकरण के अवसर उपलब्ध कराने की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस मौके पर लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाशचंद्र, राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव नरेश पारीक, को-कन्वीनर कपिल गुप्ता, को-कन्वीनर पल्लवी लढ़ा और आउटरीच प्रभारी सीमा मिश्रा, एफटीए पर डॉ. विश्वजीत नाग एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन पर डीजीएफटी की अधिकारी आशिमा, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय महामंत्री ओमप्रकाश गुप्ता, पूर्व लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन दादू, एसजीसीसीआई, सूरत के अध्यक्ष अशोक जीरावला, इचलकरंजी विधायक राहुल प्रकाश अवाडे, राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पूर्व चीफ एनवायरनमेंट इंजीनियर डॉ. विजय सिंघल, स्प्रे इंजीनियरिंग डिवाइसेस लिमिटेड के विवेक वर्मा, अग्रणी वस्त्र उद्यमी रवि पोदार और अतुल मित्तल सहित बड़ी संख्या उद्यमीगण उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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