भारत-न्यूजीलैंड के बीच एफटीए हुआ लागू, भारतीय सामानों को 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री एंट्री

20 Oct 2026 13:10:53
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार समझौते जारी लोगो की तस्वीर


भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार समझौते जारी लोगो की तस्वीर


नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (हि.स.) भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आज से लागू हो गया जिससे आज से न्यूज़ीलैंड के बाज़ारों में भारतीय उत्पादों को बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिलने लगा है और भारतीय बाज़ारों में भी न्यूज़ीलैंड के अनेक सामानों पर आयात शुल्क शून्य कर दिया गया है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यहां ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में यह जानकारी दी कि मंगलवार, 20 अक्टूबर से भारत एवं न्यूज़ीलैंड एफटीए लागू हो गया है। इस समझौते पर विगत 27 अप्रैल को नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल एवं न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किये थे।

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड में सभी भारतीय सामानों को 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। इसके साथ ही भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले कई सामान पर आयात शुल्क भी नहीं लगेगा। इससे भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड में अपना सामान बेचना आसान होगा।

गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए आज से लागू हो गया है। इसके लागू होने से अवसरों का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये का निवेश भी करेगा। गोयल के अनुसार इसका मकसद दोनों देशों के बीच में मौजूदा व्यापार को 2.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर साल 2030 तक करीब 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी करीब 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “विजयादशमी के शुभ अवसर पर भारत और न्यूजीलैंड अपनी आर्थिक साझीदारी के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए का आज लागू होना दोनों देशों के लिए एक सच्ची ‘विजय’ है।” गोयल ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड अब ‘मेड इन इंडिया’ जेसीबी मशीनों का उपयोग करेगा।

उल्लेखनीय है कि इस समझौते के तहत भारत से पहली खेप न्यूजीलैंड के लिए रवाना की गई। इस पहली खेप में महाराष्ट्र में बनी जेसीबी की छोटी खुदाई मशीन भेजी गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे रवाना किया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के कारोबारियों, किसानों, छात्रों और दूसरे लोगों के लिए नए मौके खुलेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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