
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच प्राइमरी मार्केट में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू होने जा रही है। कल से निवेशकों के पास देश की दो बड़ी और बिल्कुल अलग सेक्टर्स की कंपनियों में दांव लगाने का मौका होगा। एक तरफ रिलायंस समूह की दिग्गज और डिजिटल कनेक्टिविटी की बादशाह जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड मार्केट में अपना ऐतिहासिक आईपीओ लेकर उतर रही है तो दूसरी तरफ उत्तर भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में मजबूत पकड़ रखने वाली और घाटे से मुनाफे में शानदार टर्नअराउंड दिखाने वाली हॉस्पिटल चेन पारस हेल्थकेयर लिमिटेड अपनी किस्मत आजमा रही है। दोनों ही कंपनियों के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और भविष्य के विकास की संभावनाओं में जमीन-आसमान का अंतर है। इसलिए किसी भी आम निवेशक के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि अपनी गाढ़ी कमाई को कहां लगाना समझदारी भरा सौदा होगा और कहाँ जोखिम का स्तर अधिक है।
शुरुआत करते हैं प्राइमरी मार्केट के इस सप्ताह या कहिए इस महीने के सबसे बड़े आकर्षण यानी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आईपीओ से, जिसे कॉरपोरेट जगत का एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। कुल 30,213 करोड़ रुपये का यह विशाल आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश शेयरों के रूप में जारी हो रहा है। इसका सबसे बड़ा और सकारात्मक पहलू यह है कि इस भारी-भरकम राशि में से 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी के विस्तार और खासकर इसकी मुख्य मैटेरियल सब्सिडियरी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड पर लदे कर्ज को आंशिक रूप से चुकाने के लिए किया जाएगा।
वित्तीय सेहत के पैमाने पर कंपनी की स्थिति बेहद मजबूत और भरोसेमंद नजर आती है। पिछले दो वित्त वर्षों के आंकड़ों को देखें तो कंपनी का कुल राजस्व 1,29,333 करोड़ रुपये से करीब सोलह प्रतिशत की शानदार छलांग लगा कर 1,49,759.10 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है। मुनाफे की रफ्तार भी उतनी ही दमदार है, जहां कंपनी का शुद्ध लाभ 26,120.30 करोड़ रुपये से बढ़कर 30,052.70 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
इतना ही नहीं, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी कंपनी ने 7,764.10 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा कर अपनी मजबूत पकड़ का प्रदर्शन किया है। वहीं, 51 प्रतिशत से अधिक का ईबीआईटीडीओ मार्जिन यह साफ दिखाता है कि पूरे देश के वायरलेस ब्रॉडबैंड मार्केट में मैक्सिमम आबादी को कवर करने वाले इस डिजिटल किंग का फिलहाल कोई मुकाबला नहीं है।
दूसरी तरफ, पारस हेल्थकेयर लिमिटेड का 1,450 करोड़ रुपये का आईपीओ है। यह कंपनी मुख्य रूप बिहार और झारखंड समेत उत्तर भारत में पारस हेल्थ ब्रांड नाम से आठ सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों का संचालन करती है। इस कंपनी की कहानी घाटे से मुनाफे की तरफ बढ़ने वाले एक दिलचस्प टर्नअराउंड की तरह है। वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में क्रमशः 15 करोड़ रुपये और 57 करोड़ रुपये से अधिक का भारी भरकम शुद्ध घाटा उठाने के बाद, पिछले वित्त वर्ष यानी 2025-26 में कंपनी ने जबरदस्त रिकवरी दिखाई और 43 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ हासिल करने में सफल रही। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी कंपनी 49 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमा चुकी है, जो अस्पताल के सुधरते ऑक्युपेंसी रेट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है।
राजस्व के मोर्चे पर भी कंपनी लगातार बढ़ रही है, जहां इसका कुल रेवेन्यू पिछले दो वित्त वर्ष के दौरान 1,314.21 करोड़ रुपये से 24 प्रतिशत बढ़ कर 1,628.78 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। कंपनी की योजना अपनी मौजूदा 2,211 बेड्स की क्षमता को बढ़ा कर मार्च 2028 तक 3,011 बेड्स तक ले जाने की है, जो इसके भविष्य की विस्तार योजना को मजबूती देता है।
वित्तीय स्थिति के बाद अगर इन दोनों कंपनियों के रिस्क फैक्टर्स और कमजोर कड़ियों की बात करें तो पारस हेल्थकेयर में कुछ बड़े रेड फ्लैग्स यानी चिंता की बात नजर आती है। सबसे बड़ी चिंता कंपनी पर लदा हुआ 1,429.49 करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज है, जिसके चलते इसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो 3:21 के ऊंचे और जोखिम भरे स्तर पर है। इसके अतिरिक्त, इस 1,450 रुपये के आईपीओ में से 950 करोड़ रुपये का एक बड़ा हिस्सा ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस विंडो के जरिए सीधे प्रमोटर्स और कॉरपोरेट शेयर होल्डर्स की जेब में जाएगा, जिसका मतलब है कि इस बड़ी राशि का कोई भी फायदा अस्पताल के बिजनेस एक्सपैंशन को नहीं मिलने वाला है। इसके विपरीत, जियो प्लेटफॉर्म्स का पूरा पैसा फ्रेश इश्यू के रूप में कंपनी के अंदर आ रहा है और उससे कर्ज चुकाया जा रहा है, जो इसे वित्तीय रूप से और ज्यादा सुरक्षित और कैश-रिच बनाता है।
अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण पहलू यानी वैल्यूएशन और निवेश की अंतिम राय पर कि निवेशकों को आखिर क्या करना चाहिए। जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है, जिसके ऊपरी स्तर पर कंपनी का मार्केट कैप करीब 10,30,000 करोड़ रुपये बैठता है और पोस्ट-आईपीओ पी/ई रेशियो लगभग 33:19 आता है। डिजिटल और टेलीकॉम सेक्टर में कंपनी के पूर्ण एकाधिकार, आगामी 5-जी क्रांति और जियोब्रेन जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स के भविष्य को देखते हुए यह वैल्यूएशन बाजार के जानकारों के मुताबिक वाजिब तो है ही,आकर्षक भी है।
दूसरी ओर, पारस हेल्थकेयर ने 660 रुपये से 693 रुपये का प्राइस बैंड रखा है, जहां पोस्ट-आईपीओ पी/ई रेशियो लगभग 37:72 आता है। हालांकि यह हाल ही में लिस्टेड मनीपाल हेल्थ जैसे दिग्गजों के मुकाबले वैल्यूएशन में थोड़ी सस्ती जरूर दिखती है, लेकिन इसके भारी कर्ज के बोझ और पिछले घाटे के इतिहास को देखते हुए सुरक्षा का मार्जिन थोड़ा कम हो जाता है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक