
जामनगर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर पहुंचे और रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशाल रिफाइनरी परिसर का दौरा किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी और उनके परिवार ने उनका स्वागत किया। दौरे में रुबियो ने रिलायंस के वनतारा वन्यजीव बचाव एवं संरक्षण केंद्र और विकसित किए जा रहे स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण परिसर का भी जायजा लिया।
रुबियो की यह यात्रा भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा कारोबार और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के प्रयासों के बीच हुई। अमेरिकी प्रशासन की दिलचस्पी भारत की विशाल रिफाइनिंग क्षमता, अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों के निर्यात और वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रसंस्करण में है।
दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी परिसरों में शामिल है जामनगर
जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी की कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन बताई गई है। यह दुनिया के सबसे बड़े एकल-स्थल रिफाइनरी परिसरों में शामिल है। यहां विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है। इसकी तकनीकी क्षमता और वैश्विक बाजारों तक पहुंच इसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण बनाती है।
वेनेजुएला के कच्चे तेल पर अमेरिका का जोर
रुबियो के दौरे का एक अहम संदर्भ वेनेजुएला का कच्चा तेल है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि भारत की रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल का अधिक प्रसंस्करण करें। रिलायंस की रिफाइनरी इस काम के लिए तकनीकी रूप से सक्षम मानी जाती है।
अमेरिका की रणनीति में ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना शामिल है। भारत के लिए भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसकी रिफाइनिंग क्षमता देश को कच्चे तेल के आयात और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात—दोनों में अहम भूमिका निभाने का अवसर देती है।
अमेरिकी एलपीजी की आपूर्ति में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी
भारत में अमेरिकी ऊर्जा निर्यात की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि पिछले एक वर्ष में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिकी एलपीजी की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम से बढ़कर 67 प्रतिशत हो गई है। उनके अनुसार इससे अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया है। यह आंकड़ा दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार में आए बदलाव को रेखांकित करता है।
टेक्सास में रिलायंस के निवेश पर भी नजर
रिलायंस इंडस्ट्रीज की अमेरिका में नई तेल रिफाइनरी स्थापित करने की योजना भी इस यात्रा के व्यापक आर्थिक संदर्भ का हिस्सा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस प्रस्तावित निवेश को अमेरिका में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावना से जोड़ा है। हालांकि, परियोजना के अंतिम निवेश, समयसीमा और क्रियान्वयन की स्थिति को लेकर आधिकारिक विवरणों को अलग से देखना जरूरी है।
वनतारा और स्वच्छ ऊर्जा परिसर का भी दौरा
रिलायंस के जामनगर परिसर में रुबियो का कार्यक्रम केवल तेल शोधन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने वनतारा वन्यजीव बचाव एवं संरक्षण केंद्र और कंपनी के उभरते स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण परिसर का भी दौरा किया। इससे यात्रा में पारंपरिक ऊर्जा, नई ऊर्जा तकनीक और वन्यजीव संरक्षण—तीनों पहलुओं को जगह मिली।
भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है यह दौरा?
रुबियो की जामनगर यात्रा का महत्व केवल एक औद्योगिक परिसर के निरीक्षण तक सीमित नहीं है। यह भारत की रिफाइनिंग क्षमता और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका के प्रति अमेरिकी रुचि को दर्शाती है। अमेरिका अपने ऊर्जा निर्यात के लिए बड़े बाजारों और भागीदारों की तलाश में है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप विभिन्न स्रोतों से आपूर्ति बनाए रखने और औद्योगिक क्षमता का उपयोग करने पर ध्यान देता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे