कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को संत समाज ने बताया हिंदू त्योहारों के दौरान व्यापारिक आयोजनों को प्रभावित करने की कोशिश

22 Oct 2026 20:38:53
अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती महाराज


नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कांग्रेस पार्टी के प्रस्तावित रैली पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हिंदू त्योहार के दौरान व्यापार को नुकसान पहुंचाने के लिए विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि हिंदू त्योहारों के दौरान आंदोलन आयोजित कर त्योहारों की तैयारियों और कारोबार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीपावली है। ऐसे में त्योहारों के ठीक पहले रैली आयोजित करने का फैसला व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और गरीब तबके के लोगों के रोजगार पर असर डाल सकता है।

गुरुवार को संस्कृति संसद आयोजन के बारे में आयोजित कार्यक्रम में हिन्दुस्थान समाचार से खास बातचीत में जीतेन्द्रानंद महाराज ने कहा कि पिछले वर्ष त्योहारों के दौरान देश में करीब 6.05 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी हुई थी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू त्योहारों के दौरान इस बार सात लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है। त्योहारों के समय आंदोलन आयोजित करने से बाजार और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि ईद, बकरीद और क्रिसमस जैसे त्योहारों के दौरान इस तरह के आंदोलन क्यों नहीं होते और हिंदू त्योहारों के समय ही ऐसे कार्यक्रम क्यों आयोजित किए जा रहे हैं। साफ है हिंदू त्योहारों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।

इससे पहले 10 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठाए गए। 10 अक्टूबर को पितृ विसर्जन था और 11 अक्टूबर से दिल्ली में करीब 650 स्थानों पर रामलीला मेलों का आयोजन होना था।

उन्होंने कहा कि रामलीला मेलों में बड़ी संख्या में गरीब और छोटे कारोबारी स्टॉल लगाकर पूरी-कचौड़ी जैसे खाद्य पदार्थ बेचते हैं तथा अपनी आजीविका कमाते हैं। ऐसे में त्योहारों के आसपास आंदोलन होने से उनके रोजगार पर असर पड़ सकता था।

स्वामी जीतेन्द्रानंद ने केंद्र सरकार और विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि पिछले आंदलनों की स्थिति को प्रभावी तरीके से संभाला गया और दिल्ली में दशहरा तथा अन्य त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।

सीजेपी ने बॉन्ड भरने के बाद पीछे हटने का फैसला किया, जबकि कांग्रेस की ओर से बॉन्ड नहीं भरा गया है और वह अब भी 1 नवंबर की रैली की बात कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न आंदोलनों के जरिए हिंदू त्योहारों और उनसे जुड़े व्यापारिक आयोजनों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। देश की जनता इन घटनाओं पर नजर रख रही है और समय आने पर अपना जवाब देगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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