
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली में जंतर-मंतर पर कथित अनधिकृत प्रवेश और सरकारी आदेशों के उल्लंघन से जुड़े मामले में क्राइम ब्रांच ने कॉकroach जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को तलब किया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो एफआईआर दर्ज की थीं। फिलहाल इस मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच कर रही है।
गाैरतलब है कि, दिल्ली पुलिस ने बीते 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और सीजेपी के 11 अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निजी परिसर के रास्ते उस स्थान में प्रवेश किया, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखा गया था। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर बैरिकेड पार किए और अधिकारियों को ड्यूटी करने से रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा फहराया और नारेबाजी भी की। इस घटना के बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं।
इस मामले में पहली एफआईआर नई दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत लोक सेवक के वैध आदेश की अवज्ञा, धारा 332 के तहत अपराध करने के उद्देश्य से गृह-अतिचार और धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश से संबंधित आरोप शामिल हैं। वहीं, दूसरी एफआईआर संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई थी। यह मामला कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने, उन पर हमला करने और चोट पहुंचाने जैसे आरोपों से संबंधित है।
दिल्ली पुलिस ने दोनों ही मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। जांच के तहत घटना के दौरान हुई गतिविधियों और संबंधित आरोपों की पड़ताल की जा रही है। वहीं, जंतर-मंतर की घटना से पहले 10 अक्टूबर को भी सौरव दास और आशुतोष रांका को एक विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। दोनों ने शांति बनाए रखने के लिए एक साल की अवधि का बांड भरा था।
13 अक्टूबर की घटना के बाद पुलिस ने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने पहले दिए गए आश्वासन का उल्लंघन किया। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बाद में उनकी हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई। वहीं, अजिंक्य शिंदे को 5,000 के मुचलके पर रिहा किया गया था। उनके मामले में शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तें लगाई गई थीं।
सीजेपी की ओर से गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाई को गैरकानूनी बताया गया है। पार्टी ने जमानतदारों से संबंधित प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे और अदालत के आदेश को चुनौती देने की बात कही थी। हालांकि, पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कथित उल्लंघनों के मद्देनजर की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी