मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन उद्योग को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के साथ जोड़ा जाएगा : मोहन यादव

23 Oct 2026 17:17:53
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


- भोपाल में हुआ राष्ट्रीय फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026

भोपाल, 23 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन उद्योग को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के साथ जोड़ा जाएगा। इसके अंतर्गत मछली उत्पादन के बाद इसके प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, मार्केटिंग संबंधी अन्य सभी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग को एमएसएमई इंडस्ट्री से जोड़कर सभी प्रकार के प्रोत्साहन और इन्सेंटिव भी दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय 'फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पंचायती राज, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल के साथ इस कॉन्क्लेव का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए फिश एक्सपोटर्स और प्रदेश के जिलों से आए मछली उत्पादक किसान उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मत्स्य उत्पादकों एवं निवेशकों को सभी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में लागू एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के अंतर्गत मत्स्य उद्योग के विस्तार के लिए इस क्षेत्र के निवेशकों को भूमि आवंटन, तकनीकी मदद और अन्य कई प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 में यह प्रावधान किया है कि प्रदेश का मत्स्य उत्पादन हम जल्द से जल्द दोगुना कर देंगे। इससे मत्स्य उत्पादकों, विक्रेताओं, मत्स्य परिवहनकर्ताओं और मछली पालन से जुड़े सभी मत्स्यपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार मध्यप्रदेश में नई नीली क्रांति लाने के लिए तैयार है। मप्र की जल सम्पदा को निवेश, नवाचार और निर्यात से जोड़कर हम मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन के मामले में देश का अग्रणी केन्द्र बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में उपलब्ध अथाह जलराशि का बेहतर सप्रबंधन कर जलचरों का संरक्षण भी कर रहे हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां कई बड़ी जल संरचनाएं मौजूद हैं। मध्यप्रदेश में उपलब्ध जल स्रोतों को बहुआयामी जलस्रोत बनाने जा रहे हैं। एक जल स्रोत से लोगों को पीने का पानी, किसानों को खेती के लिए पानी, पशुपालकों को पशुओं के लिए पानी, मछली उत्पादन, जल पर्यटन सहित जलीय जीवों को भी संरक्षण मिलता है। किसानों और मत्स्य पालकों दोनों की आर्थिक स्थिति हालत सुधारने के लिए राज्य सरकार इस दिशा में ठोस काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई नीति अतंर्गत प्रदेश में 1 लाख नए केज़ कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य लिया है। प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में भी बड़े तालाब निर्मित करेंगे, ताकि वन्य जीवों के साथ-साथ इन तालाबों का लाभ मत्स्यपालकों को भी मिले।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल स्रोतों का बेहतर प्रबंधन करते हुए खेती के लिए निरंतर सिंचाई सुविधाओं को बढ़ा रही है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 69 लाख हैक्टेयर हो चुका है। राज्य सरकार ने इसे 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मध्यप्रदेश में नदी जोड़ो अभियान- केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) से जल रचनाओं का निर्माण होगा। इससे फिशरीज़ प्रोडक्शन में नया दौर शुरू होगा। चंबल में घड़ियालों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि सभी नदियों में जलीय जीवों की उपलब्धता हो, इसीलिए नर्मदा नदी में 6 मगरमच्छ छोड़े गए हैं।

जल संसाधनों का करेंगे बेहतर उपयोग : मंत्री पवार

मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पवार ने कहा कि मछुआरों को बेहतर आय के साधनों से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। प्रदेश के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए मत्स्य उद्योग को नई ऊंचाई पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मत्स्य पालन के लिए नई नीति लागू करने के साथ ही प्रदेश के उपयुक्त जलाशयों में आधुनिक केज़ कल्चर को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश का मत्स्य उद्योग आगामी वर्षों में आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनेगा।

मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि राज्य में मत्स्य पालन, रोजगार और निवेश को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का मत्स्य उत्पादन 4.45 लाख टन है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्लू रिव्योल्यूशन (नीली क्रांति) का लक्ष्य रखा है। उद्देश्य की पूर्ति करते हुए मध्यप्रदेश ने अपना मत्स्य उत्पादन अगले 3 वर्ष में 10 लाख टन करने का संकल्प लिया है। हर साल 5 हजार करोड़ का निवेश बढ़ेगा, जिससे 50 हजार रोजगार के अवसर सृजित होंगे। फिशरीज सेक्टर में मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार से पूरा सहयोग मिल रहा है। राज्य सरकार निवेशकों को सहयोग प्रदान करेगी, जिससे उन्हें अच्छा रिटर्न मिल सके।

केन्द्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र देश के 6 करोड़ मछुआरों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही खाद्य एवं पोषण सुरक्षा और सी-फूड निर्यात में भी अहम है। भारत ने वैश्विक स्तर पर मछली पालन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मत्स्य उद्योग को बढ़ाने में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य की मत्स्य उद्योग नीति-2026 मत्स्य पालन को आगे बढ़ाने में क्रांतिकारी सिद्ध होगी।

प्रदेश के मत्स्य पालन, मछुआ विकास एवं कल्याण सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रचुर मात्रा में जल संसाधन उपलब्ध हैं। देश का बड़ा इंदिरा सागर जलाशय मध्यप्रदेश में स्थित है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत देश में सबसे पहले पहल करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मत्स्य उद्योग नीति-2026 का धरातल पर सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। हमारी नई नीति से देश में पहली बार इंटीग्रेटेड फिशिंग मॉडल में निजी निवेश के द्वार खुले हैं।

इसमें मत्स्य पालन के साथ एक्रोपोनिक्स, मोती पालन, बतख पालन को भी शामिल किया गया है। मत्स्य निवेशकों को सिंगल पोर्टल के माध्यम से निवेश की सुविधा प्रदान की जाएगी। मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य है। मध्यप्रदेश के 49 जलाशयों में मत्स्य पालन के लिए सुविधाएं विकसित करने के लिए राशि को स्वीकृति दी जा रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

Powered By Sangraha 9.0