अमूर फाल्कन ‘अपापांग’ और ‘अलंग’ 23 देशों से होकर मणिपुर लौटे, अब 6000 किमी. की अगली उड़ान की तैयारी

23 Oct 2026 12:19:53
अमूर फाल्कन पक्षियों को लगाया गया था ट्रांसमीटर


पक्षियों द्वारा तय की गई दूरी का नक्शा


नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (हि.स.)।

प्रवासी पक्षियों की लंबी और रोमांचक यात्रा का एक और अध्याय पूरा हो गया है। अमूर फाल्कन ‘अपापांग’ और ‘अलंग’ करीब 11 दिन पहले उत्तर-पूर्वी चीन के अपने प्रजनन स्थलों से उड़ान भरने के बाद मणिपुर पहुंच गए हैं। इन दोनों पक्षियों ने एशिया और अफ्रीका के रास्ते अपनी यात्रा के दौरान 23 देशों को पार किया। इसके साथ ही नवंबर, 2025 में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के वैज्ञानिकों द्वारा टैग किए जाने के बाद उनकी लगभग एक साल की ट्रैकिंग और मणिपुर तक वापसी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'एक्स' पर दोनों पक्षियों की तस्वीरें साझा कर बताया कि दोनों अमूर फाल्कन अब मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के पहाड़ी इलाकों में चुनिंदा स्थानों पर दो से तीन सप्ताह तक रुक सकते हैं। यहां स्थानीय लोग हर साल इन प्रवासी पक्षियों की वापसी का इंतजार करते हैं और उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रवास के दौरान अमूर फाल्कन अपने ठहराव वाले क्षेत्रों में निकलने वाले दीमकों को खाकर शरीर में वसा का भंडार बढ़ाएंगे। यह ऊर्जा उनकी अगली लंबी उड़ान के लिए बेहद जरूरी है। मणिपुर से आगे बढ़ने के बाद इन पक्षियों को सोमालिया तक लगभग 6,000 किलोमीटर की उड़ान भरनी होगी। इस यात्रा में वे करीब छह दिनों तक बिना रुके उड़ान भर सकते हैं। इस मार्ग में लगभग 3,000 किलोमीटर तक अरब सागर के ऊपर से उड़ान भरना भी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि मणिपुर वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने इन पक्षियों के प्रवासी मार्गों, व्यवहार और लंबी दूरी की उड़ान को समझने के लिए पिछले साल यानी नवम्बर, २०२५ में ‘मणिपुर अमूर फाल्कन ट्रैकिंग प्रोजेक्ट’ शुरू किया। इस परियोजना के जरिए वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिल रही है कि ये पक्षी किन रास्तों से गुजरते हैं, कहां ठहरते हैं और समुद्र के ऊपर लंबी उड़ान के दौरान किस तरह अपनी यात्रा पूरी करते हैं।

परियोजना के दूसरे चरण में नवंबर, 2025 में मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के चिउलुआन रोस्टिंग स्थल से तीन अमूर फाल्कन को सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर छोड़ा गया था। इनमें अपापांग नाम का नर पक्षी और आहू तथा अलांग नाम की दो मादा पक्षी शामिल थीं। इन पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखकर वैज्ञानिकों ने उनकी अंतरमहाद्वीपीय यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। अब अपापांग और अलांग की मणिपुर वापसी से उनके प्रवास चक्र के अध्ययन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अमूर फाल्कन अपनी लंबी दूरी की प्रवास यात्रा के लिए प्रसिद्ध हैं। छोटे आकार के ये पक्षी मौसम और भोजन की उपलब्धता के अनुसार हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। चीन से एशिया और अफ्रीका तक की उनकी यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण और पक्षियों की निगरानी के महत्व को रेखांकित करती है।

मणिपुर के तामेंगलोंग में स्थानीय समुदायों की भागीदारी इन पक्षियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण है। हर साल उनकी वापसी का इंतजार और उनके सुरक्षित प्रवास के लिए किए जाने वाले प्रयास दिखाते हैं कि स्थानीय सहयोग से प्रवासी वन्यजीवों की रक्षा कैसे की जा सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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