
जम्मू, 25 अक्टूबर (हि.स.)। विश्व हिंदू परिषद जम्मू कश्मीर ने पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में पुलिस ऑडिटोरियम जम्मू में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा कि अशोक जी का जीवन ऐसा था जिसमें बनने की कोई इच्छा नहीं थी। जीवन के अंदर करना ही करना यही मन का भाव था। उन्होंने बनने का सोचा नहीं दायित्वों के बारे में जो काम मिल गया वे उसको करते चले गए। वे संघ के स्वयंसेवक बने, जैसा-जैसा संघ कहता गया वैसा-वैसा वो करते चले गए। इसी भाव को मन में लेकर सारे देश के अंदर 1000 साल बाद इस देश के भाग्य को बदलने का एक अवसर आया है। उस 40 पीढ़ी के लोगों ने बलिदान दिए, जो कष्ट सहे उन सबका स्मरण करते हुए हम सब लोग उनके बलिदान, उनके कष्ट व्यर्थ न जाए, एक सौभाग्य का अवसर जो हमको प्राप्त हुआ है उसके लिए कैसे जीवन जीना तो माननीय अशोक जी का जीवन हम सबके लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।
उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने-अपने जीवन को तराशते हुए हम राष्ट्र निर्माण के इस महत्वपूर्ण कालखंड के अंदर अपनी भूमिका अदा करें।
उन्होंने कहा कि एक हजार साल से जो शक्तियां हमसे लड़ रही थीं, धीरे धीरे करके उनको ध्यान में आना शुरू हुआ कि अब उनका वर्चस्व नहीं रहेगा। दो शक्तियां जिसकी चर्चा हुई, पिछले सौ साल में दुनिया के अंदर दो विचार और बड़े वो कम्युनिज्म का और ग्लोबल मार्केट फोर्सेस का। ये सारी शक्तियों को ध्यान में आ गया कि असली चुनौती भारत के अंदर है और इन सब लोगों को ध्यान में आ गया कि अकेले-अकेले हम लड़ नहीं सकते तो मिलकर लड़ेंगे।
सारे देश के अंदर 1 हजार साल बाद ये जो हिंदुत्व का भाव जगा है, समाज देश के लिए जीने की इच्छा जगी है, अपने समाज की कमियों को दूर करके एक समरस समाज बनाने का जो भाव जगा है, भारत राष्ट्र का एक मजबूत राष्ट्र के रूप में, देशभक्ति के आधार पर देश खड़ा करने का वातावरण बना है, इसको सब ने टारगेट करना शुरू किया।
सारे देश के अंदर हम देखते हैं कि मीडिया, सोशल मीडिया, इस सबके माध्यम से इस हिंदुत्व के वातावरण को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है। सारे देश में समाज को जातियों के आधार पर, छोटे-छोटे प्रश्नों के आधार पर बांटने के प्रयास हो रहे हैं।
समाज में भ्रम का वातावरण खड़ा करने का प्रयास हो रहा है कि ये हिंदुत्व का आंदोलन पहचानें खत्म कर देगा, ये भाषाएं समाप्त कर देगा।
उन्होंने कहा कि भारत के अंदर हिंदू कभी पूजा पद्धति नहीं थी, हमारी सांझी पहचान थी।
भारत की पूर्व वैदिक काल से लेकर आज तक की जो यात्रा है, उस यात्रा का समुच्च यानी हिंदू है।
भारत में किसी कालखंड में हिंदू पूजा पद्धति नहीं थी, ये अंग्रेजों ने 1881 के अंदर जो पहली जनगणना की उसमें दिखा। 1861 की पहली जनगणना उन्होंने की वो बीच में छोड़ दी, उसमें तीन ही कॉलम थे। एक सेमेटिक रिलिजन ईसाई, मुसलमान, यहूदी। दूसरा इंडो आर्य, पारसी। और तीसरा हिंदू।
भारत के अंदर हिंदू कभी पूजा पद्धति नहीं था। हिंदू हमारी एक सांझी पहचान था। इसको तोड़ना था, इसलिए 1881 के अंदर जनगणना जब हुई तो उस जनगणना में पहली बार में उन्होंने कॉलम बनाए- सिख, जैन, बौद्ध, हिंदू। इन सबको उन्होंने अलग कर दिया। उसके साथ आदिवासी। यह जो आज हम कभी-कभी सुनते हैं, हम हिंदू नहीं है, सारा उसमें से लिया जा रहा है। मजे की बात है कि १८81 की जनगणना में तो हिंदू भी नहीं था अन्य ही था।
विश्व हिंदू परिषद की स्थापना हुई, उस स्थापना के समय में मास्टर तारा सिंह भी थे, बौद्ध संत भी थे, जैन संत भी थे, बाकी सब मत संप्रदायों के संत भी थे।
सबने मिलकर कहा कि यह हमारी एक सांझी पहचान है।
इस हिंदुत्व को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है, सारे समाज को छोटी-छोटी पहचानों पर बांटने का प्रयास चल रहा है।एक भ्रम का वातावरण, एक भेद का वातावरण, जातियों के अभिवेश खड़े करना, एक जाति से दूसरी जाति, समाज के अंदर आने वाले समय के अंदर ये समाज बांटने वाली शक्तियों के षड्यंत्र, उनके प्रयास बढ़ने वाले हैं। इसलिए समाज को सजग रहना चाहिए।
इस अवसर पर अन्य वक्ताओ ने कहा की अशोक सिंहल जी के प्रेरणादायी जीवन, उनके दूरदर्शी चिंतन तथा राष्ट्र और समाज के प्रति उनके अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा एवं कृतज्ञता अर्पित की जाएगी।
अयोध्या धाम की मुक्ति के बाद हमें आशा है कि इस वर्ष में हम काशी और मथुरा की मुक्ति के उनके महान संकल्प को भी द्रुत गति से आगे बढ़ाएंगे। अवैध धर्मांतरण पर प्रतिबंध, घर वापसी को बढ़ावा, वैदिक ज्ञान-विज्ञान के प्रचार प्रसार, मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति तथा सामाजिक समरसता व सेवा के उनके अधूरे कार्यों को गति देकर उनका पुण्य स्मरण करेंगे। इसके लिए हम वर्ष भर हजारों विचार गोष्ठियों, सभाओं और अन्य प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
उन्होंने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का उद्देश्य श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के जीवन-संदेश को व्यापक समाज तक पहुँचाना, भारतीय संस्कृति के प्रति गौरवबोध जागृत करना तथा सेवा, संगठन, संस्कार और सामाजिक समरसता के कार्यों को नई ऊर्जा प्रदान करना है।
इस कार्यक्रम में श्री हृदय दीप आश्रम के पीठाधीश स्वामी स्वामी हृदयानंद जी महाराज, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजेश गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक डॉक्टर गौतम मेंगी एवं गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहे!
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह