
तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु), 26 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यहां कहा कि सरकार राजकोषीय घाटा कम करने के लिए प्रतिबद्ध है, जैसा कि सालाना बजट में नजर आता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक राष्ट्रीय ऋण को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 50 फीसदी तक सीमित रखा जाएगा।
सीतारमण ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज के प्लैटिनम जुबली समारोह के दौरान अपने संबोधन में यह बात कही। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राष्ट्रीय ऋण को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद से हर देश ऋण संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
सीतारमण ने कहा, ‘‘हम वार्षिक बजट से जाहिर होने वाली अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप राजकोषीय घाटा घटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने खुले तौर पर अपना लक्ष्य बताया है कि 2030 तक राष्ट्रीय ऋण को जीडीपी के 50 फीसदी तक सीमित रखा जाएगा। हम सरकार के ऋण को कम करने के लिए लगातार उपाय कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ऋण प्रबंधन के प्रति भारत के अनुशासित दृष्टिकोण को स्वीकार किया है।’’
उन्होंने कहा कि वर्ष 2051 में सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज (एसआरसी) अपने 100 साल पूरे करेगा। यह भारत की आज़ादी के 100 साल पूरे होने के 4 साल बाद का समय होगा और आज यहां मौजूद छात्राएं उस समय 'विकसित भारत' का नेतृत्व करने वाली महिलाओं में शामिल होंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर