ट्राई ने इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं के लिए आसान प्राधिकरण व्यवस्था की सिफारिश की

26 Oct 2026 17:24:53
ट्राई


नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इंटरनेट के जरिए टीवी चैनल दिखाने वाली (इंटरनेट आधारित टीवी चैनल वितरण) सेवाओं के लिए अलग प्राधिकरण व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है। इसमें मुफ्त विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टेलीविजन (फास्ट) सेवाएं भी शामिल होंगी। इसके तहत ऐसी सेवाएं चलाने वाली कंपनियों को प्राधिकरण लेना होगा। ट्राई ने इसके लिए 20 साल की शुरुआती अवधि, एक लाख रुपये प्रवेश शुल्क और 10 हजार रुपये आवेदन शुल्क का प्रस्ताव दिया है। इसमें कोई सालाना प्राधिकरण शुल्क, बैंक गारंटी या सुरक्षा जमा नहीं होगा।

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने बताया कि ट्राई ने इन सेवाओं को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत टीवी चैनल वितरण सेवाओं की अलग श्रेणी में रखने का सुझाव दिया है। इन सेवाओं के जरिए स्मार्ट टीवी, मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट और अन्य इंटरनेट से जुड़े उपकरणों पर तय कार्यक्रम के अनुसार टीवी चैनल देखे जा सकते हैं। प्राधिकरण की अवधि पूरी होने के बाद हर बार 10 साल के लिए नवीनीकरण किया जा सकेगा। इन सेवाओं के लिए पूरा देश एक सेवा क्षेत्र होगा।

ट्राई की सिफारिशों के अनुसार प्राधिकरण, चैनलों के पंजीकरण और रिपोर्टिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय एएलटीडी एप्लिकेशन का केंद्रीय डेटाबेस रखेगा। टीवी और अन्य उपकरण बनाने वाली कंपनियों तथा ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदाताओं को अपने उपकरणों और एप्लिकेशन स्टोर पर केवल अधिकृत एप्लिकेशन उपलब्ध कराने होंगे। उन्हें मंत्रालय को हर साल अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी।

ट्राई ने केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त टीवी चैनलों के साथ इंटरनेट पर शुरू हुए रैखिक टीवी चैनलों के सरल पंजीकरण की भी सिफारिश की है। सेवा प्रदाता केवल उन्हीं चैनलों का प्रसारण कर सकेंगे, जिनके पास केंद्र सरकार की वैध अनुमति या पंजीकरण होगा। हालांकि, केवल अपने या अपनी सहायक अथवा होल्डिंग कंपनी के चैनल दिखाने वाले प्रसारकों के प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया मंचों पर होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग को इस व्यवस्था से बाहर रखने का प्रस्ताव है।

उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए एप्लिकेशन प्रदाता को मुख्य संपर्क बिंदु बनाने की सिफारिश की गई है। इन एप्लिकेशन के जरिए देखे जाने वाले टीवी चैनलों की दर्शक संख्या को भी टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इंटरनेट आधारित टीवी चैनल वितरण सेवाओं के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को ट्राई अधिनियम-1997 की धारा 11(1)(क) के तहत इस विषय पर प्राधिकरण से सिफारिशें मांगी थीं। इसके बाद ट्राई द्वारा इसी साल 06 अप्रैल मांगे गए परामर्श पत्र में आम सुझाव पर 207 टिप्पणियां और 11 प्रति-टिप्पणियां मिलीं। इसके बाद 10 जून को खुली चर्चा हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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