सेना को हमेशा आगे रहने के लिए नई क्षमताओं के साथ बेहतर तरीके खोजने होंगे

26 Oct 2026 16:53:53
पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह


- चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में 14-15 दिसंबर को संगोष्ठी में खोजे जाएंंगे युद्ध लड़ने के तरीके

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि सेना को हमेशा आगे रहने के लिए न केवल नई क्षमताएं विकसित करनी होंगी, बल्कि अपने मौजूदा मिलिट्री प्लेटफॉर्म को ज्यादा असरदार, जानलेवा और ज्यादा टिकाऊ बनाने के लिए बेहतर तरीके भी खोजने होंगे। उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सटीक हथियार और दूसरी नई टेक्नोलॉजी आज के समय में युद्ध लड़ने के तरीके को बदल रही हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह सोमवार को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 'मेकेनाइजेशन टेक्नोलॉजी संगोष्ठी 2.0' (एमटीएस 2.0) के पूर्वावलोकन कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसका आयोजन पश्चिमी कमान ने सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के सहयोग से किया था। उन्होंने चंडीगढ़ के चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में 14-15 दिसंबर को 'भविष्य के युद्ध के लिए वर्तमान प्लेटफॉर्म का रूपांतरण' थीम पर होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा भी रखी। इसमें भारतीय सेना, रक्षा उद्योग और शिक्षा जगत के हितधारक एकत्रित होंगे, ताकि मशीनीकृत बलों की प्रौद्योगिकीय प्रगति और उनकी क्षमता संवर्धन पर चर्चा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि हमारा मकसद भारतीय टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का सबसे अच्छा इस्तेमाल करना है, ताकि हमारे मौजूदा कॉम्बैट प्लेटफॉर्म को भविष्य के युद्ध के मैदान में एक अहम बढ़त मिल सके। जो बात इस पहल को अलग बनाती है, वह है हमारा बॉटम-अप अप्रोच। हमारे सैनिकों को जमीन पर असल में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और टेक्नोलॉजी उनसे निपटने में कैसे मदद कर सकती है? इन ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर हमने खास समस्याओं की पहचान की है और प्रॉब्लम डेफिनिशन स्टेटमेंट बनाए हैं, जिन्हें हम इंडियन इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और एकेडेमिया के साथ शेयर कर रहे हैं। हम प्रॉब्लम स्टेटमेंट के लिए प्रैक्टिकल, सस्ते और इनोवेटिव सॉल्यूशन ढूंढ रहे हैं।

पश्चिमी कमान की यह संगोष्ठी युद्ध क्षमता बढ़ाने, प्रौद्योगिकी का उपयोग करने, अनुकूलन क्षमता, काइनेटिक्स (गतिशीलता/प्रहार क्षमता), नवीनीकरण और 'आत्मनिर्भरता' पर केंद्रित होगी। इसमें मुख्य जोर इस बात पर होगा कि कैसे परिचालनगत कमियों और आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित 'प्रॉब्लम डेफिनेशन स्टेटमेंट्स' (पीडीएस) में बदला जाए। इसमें स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित आधुनिकीकरण, नागरिक-सैन्य सहयोग और 'आत्मनिर्भरता' के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही सैन्य उपयोगकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों को एक मंच मिलेगा, ताकि वे वर्तमान प्लेटफॉर्म्स के आधुनिकीकरण, स्वदेशी प्रौद्योगिकी नवाचार और उभरती प्रचालनगत आवश्यकताओं पर चर्चा कर सकें। ------------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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