लिकटेंस्टाइन के प्रिंस की भारत यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति मिलने की उम्मीद

27 Oct 2026 19:44:53
लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस एवं प्रधानमंत्री मोदी


नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (हि.स.)। लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की भारत यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति मिलने की उम्मीद है। यात्रा से सरकारों और कारोबारों को संपर्क बढ़ाने के अवसर मिले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रिंस की मंगलवार को हुई वार्ता में तकनीक, नवाचार और कौशल विकास में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर प्रिंस एलोइस 25 से 28 अक्टूबर तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति भवन में आज सुबह उनका औपचारिक स्वागत हुआ। प्रधानमंत्री ने उनके सम्मान में भोज दिया। यह उनकी भारत की पांचवीं यात्रा है। उनके साथ उनकी पत्नी राजकुमारी सोफी, एक उच्चस्तरीय अधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल है। इसमें लिकटेंस्टीन के विदेश मंत्री और उपप्रधानमंत्री, साथ ही लिकटेंस्टीन स्थित कंपनियों के सीईओ और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि लिकटेंस्टीन मध्य यूरोप में स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के बीच स्थित एक छोटा और बेहद समृद्ध संवैधानिक राजशाही देश है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस ने आज हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय व्यापार तथा निवेश बढ़ाने के उपायों पर बात की। उन्नत विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं, कृषि, अंतरिक्ष, शिक्षा और कौशल विकास को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया गया। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर विचार साझा किए तथा सांस्कृतिक और जन-संपर्क संबंध मजबूत करने पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने उनकी यात्रा पर आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि प्रिंस एलोइस की यात्रा भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के संचालन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है। समझौते में ईएफटीए देशों से 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और भारत में दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की परिकल्पना है। दोनों पक्षों ने दोहरे कराधान से बचाव के प्रस्तावित समझौते पर भी चर्चा की।

उन्होंने बताया कि प्रिंस एलोइस के साथ लिकटेंस्टाइन का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। दोनों देशों के बीच व्यापार में दवाइयां और विद्युत उत्पादों का निर्यात तथा भारत में सटीक उपकरण, घरेलू उपकरण और मशीनरी का आयात शामिल है। लिकटेंस्टाइन से भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करीब 11 करोड़ डॉलर रहा है।

इससे पहले प्रिंस एलोइस ने वडोदरा में हिल्टी की नई अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई का दौरा किया। हिल्टी और सवाना सीट्स सहित लिकटेंस्टाइन की कुछ कंपनियां भारत में पहले से मौजूद हैं। दोनों देशों ने संस्थागत साझेदारी, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और उद्योगों से जुड़ाव के जरिए कौशल विकास तथा व्यावसायिक शिक्षा में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी चर्चा की।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

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