डॉ. मोहन भागवत अचानक पहुंचे भोपाल, जैन आचार्य समय सागर महाराज से की मुलाकात

28 Oct 2026 23:37:53
आचार्य समय सागर महाराज से संवाद करते हुए मोहन भागवत


संघ कार्यालय पहुंचा सरसंघचालक का काफिला


- समिधा में संघ के अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ भी हुई बैठक

भोपाल, 28 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बुधवार को अचानक भोपाल पहुंचे। यहां उन्होंने संघ कार्यालय समिधा में पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद एमपी नगर के पास चातुर्मास कर रहे जैन आचार्यश्री समय सागर महाराज से मुलाकात की। मुलाकात के बाद डॉ. भागवत इंदौर के लिए रवाना हो गए हैं।

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का भोपाल पहुंचने स्वप्निल कुलकर्णी, संघ के प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता और कैलाश लोवंशी ने स्वागत किया। भोपाल प्रवास के दौरान डॉ. भागवत संघ कार्यालय समिधा पहुंचे। यहां उन्होंने संघ के अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की।

इसके बाद डॉ. भागवत ने एमपी नगर पहुंचकर भोपाल में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान दोनों के बीच समाज सेवा, शिक्षा, स्वावलंबन, जीवदया और भारतीय संस्कृति के संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। करीब एक घंटे तक डॉ. भागवत चातुर्मास स्थल पर रहे। उन्होंने भोपाल में निर्माणाधीन जिनालय का भी अवलोकन किया।

इस अवसर पर आचार्यश्री समयसागर महाराज के चरणों में श्रीफल समर्पित कर डॉ. भागवत का शाल, श्रीफल और तिलक लगाकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय, क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर के पदाधिकारी तथा भोपाल जैन समाज के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।

संवाद के दौरान आचार्यश्री समयसागर महाराज से प्रेरित विभिन्न जनकल्याणकारी प्रकल्पों पर विचार-विमर्श हुआ। इनमें दयोदय गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास, हथकरघा केंद्रों के माध्यम से श्रमिकों को रोजगार और स्वावलंबन से जोड़ने की पहल, प्रतिभास्थली शिक्षण संस्थान, आयुर्वेदिक चिकित्सालय और देश के विभिन्न स्थानों पर बन रहे पाषाण जिनालय प्रमुख रहे। इन प्रकल्पों के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, जीवदया और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है।

आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का किया स्मरण

मुलाकात के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज का भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में उनके अंतिम दर्शन से जुड़ी स्मृतियां भी साझा कीं। आचार्य विद्यासागर महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, करुणा, स्वदेशी और स्वावलंबन के आदर्शों के लिए जाना जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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