'ऑपरेशन सिंदूर' से और मजबूत हुई भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई : राजनाथ

29 Oct 2026 14:22:53
आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते राजनाथ सिंह


- भारत अपने साझेदारों के साथ सुरक्षित, स्थिर और शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (हि.स.)। फिलीपींस के सेबू में 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई सिर्फ थ्योरी वाली नहीं है, बल्कि दशकों के जमीनी अनुभव और सफल ऑपरेशन से और मजबूत हुई है। 'ऑपरेशन सिंदूर' ने आतंकवादी ढांचे को खत्म करके दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ भारत का पक्का इरादा दिखाया। भारत अपने साझेदारों के साथ यह अनुभव साझा करके सुरक्षित, स्थिर और शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में शामिल राजनाथ सिंह ने आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के सामने कहा कि भारत और आसियान की युवा आबादी हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसी सामर्थ्य को नई दिशा देने के लिए भारत ने मजबूत 'डिफेंस यूथ ब्रिज' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो पीपल-टू-पीपल कनेक्टिविटी, डिजिटल इनोवेशन और कैपेसिटी-बिल्डिंग को बढ़ावा देगा। युवाओं को सशक्त बनाकर हम एक सुखद, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक के भविष्य को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा कि 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना भारत की रक्षा और विदेश नीति का मूल आधार है। एडीएमएम-प्लस की थीम 'हमारे भविष्य को एक साथ आगे बढ़ाना' साझा जिम्मेदारी, आपसी विश्वास और सहयोग के महत्व को दर्शाती है। भारत खुला, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें आसियान की केंद्रीय भूमिका और भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी महत्वपूर्ण हैं। भारत ने दशकों से भारतीय नौसेना के माध्यम से वैश्विक समुद्री व्यापार और महत्वपूर्ण समुद्री संचार लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। एक विश्वसनीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत नेविगेशन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के सम्मान के साथ सुरक्षित एवं स्थिर इंडो-पैसिफिक के लिए प्रतिबद्ध है।

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के सभी रूपों के उन्मूलन और सामूहिक क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद-रोधी अभियानों में भारत का व्यापक अनुभव केवल कक्षा तक सीमित सैद्धांतिक ज्ञान नहीं है, बल्कि सीमा पार की जटिल सुरक्षा चुनौतियों का दशकों तक सीधे सामना करके धरातल पर अर्जित किया गया अनुभव है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रत्येक रणनीति को वास्तविक परिस्थितियों में संचालित अभियानों के दौरान परखा गया है, उसे और अधिक प्रभावी बनाया गया है तथा उसकी उपयोगिता सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा कि भारत के इस सक्रिय और धरातल पर परखे गए सिद्धांत का निर्णायक प्रदर्शन 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हुआ, जब भारत ने आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त किया और राज्य प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार की समझौता न करने वाली स्पष्ट सीमा निर्धारित की।

राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत आसियान की केंद्रीय भूमिका और सुरक्षित, मुक्त, समावेशी, सुदृढ़ तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को विशेष महत्व देता है, जहां शांति और स्थिरता केवल आकांक्षाएं नहीं, बल्कि सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि आसियान के साथ भारत का रणनीतिक जुड़ाव दीर्घकालिक है और साझा हितों, पारस्परिक सम्मान तथा व्यावहारिक सहयोग पर आधारित है। उन्होंने पिछले वर्ष अक्टूबर में कुआलालंपुर में आयोजित दूसरी आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बैठक में आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी पहलुओं और वर्ष 2026 से 2030 के लिए आसियान-भारत कार्य योजना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।

रक्षा मंत्री ने भारत-आसियान रक्षा सहयोग को मजबूत करने में युवाओं की भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की युवा आबादी की समान जनसांख्यिकीय विशेषताएं और आकांक्षाएं अधिक गहरी क्षेत्रीय साझेदारी के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने संस्थागत स्तर पर जन-जन के बीच संपर्क बढ़ाने, डिजिटल नवाचार को प्रोत्साहित करने और एडीएमएम-प्लस की पहलों के अनुरूप क्षमता निर्माण को सुविधाजनक बनाने के लिए रक्षा क्षेत्र में एक समर्पित ‘यूथ ब्रिज’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि युवाओं को सशक्त बनाना और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा में योगदान देने के लिए उन्हें अधिक अवसर उपलब्ध कराना ‘युवा, शांति और सुरक्षा’ की विषयवस्तु के अनुरूप है। यह एक शांतिपूर्ण, सुदृढ़ और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए भी आवश्यक है।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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