ग्रीन हाइड्रोजन में भारत बना दुनिया का अग्रणी देश, 9.5 अरब डॉलर के हुए समझौते: प्रह्लाद जोशी

29 Oct 2026 18:02:53
ग्रीन हाइड्रोजन के जारी लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय कंपनियों द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए किए गए कुल ऑफटेक समझौता अक्टूबर 2026 तक बढ़कर 5,55,610 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से जयादा हो गए हैं। इसके साथ ही भारत ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति संबंधी प्रतिबद्धताओं में दुनिया का अग्रणी देश बन गया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन में भारत बना दुनिया का अग्रणी देश, 9.5 अरब डॉलर के समझौते हुए हैं।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में ये जानकारी दी है। मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों ने 4 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक ग्रीन हाइड्रोजन के समतुल्य मात्रा की आपूर्ति के लिए 18 नए ऑफटेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मंत्रालय ने बताया कि अक्टूबर 2026 तक भारतीय कंपनियों द्वारा कुल ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किए गए ठोस और हस्ताक्षरित समझौते 5,55,610 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंच गए हैं। यह राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्य का लगभग 11 फीसदी है। इससे भारत ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बन गया है।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, “भारतीय कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए 23 प्रमुख अनुबंध हासिल किए हैं, जिनके तहत 5.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक की आपूर्ति प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। इनमें 70 फीसदी से अधिक हिस्सा वैश्विक निर्यात के लिए निर्धारित है।“

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 90,000 करोड़ रुपये का निवेश बढ़ा है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत को वैश्विक स्तर पर नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य में अग्रणी बनने और हरित रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।”

मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) को मंत्रिमंडल द्वारा वित्त वर्ष 2029-30 तक 19,744 करोड़ रुपए के प्रारंभिक परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई। मिशन का उद्देश्य 2030 तक प्रति वर्ष कम-से-कम 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। इसके अलावा, मिशन के अपेक्षित परिणामों में नवीकरणीय ऊर्जा (आरएमई) क्षमता में 125 गीगावाट की वृद्धि, 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल निवेश, 6 लाख से अधिक पूर्णकालिक नौकरियों का सृजन और प्रति वर्ष 50 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी शामिल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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