पांच शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने को मंजूरी

03 Oct 2026 19:25:53

नई दिल्ली, 03 अक्टूबर (हि.स.)। शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय असमिया, बंगाली, मराठी, पालि और प्राकृत के अध्ययन के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित करने को मंजूरी दी है।

मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, इन केंद्रों का उद्देश्य संबंधित भाषाओं में उन्नत अकादमिक शोध को बढ़ावा देने के साथ-साथ भाषाई एवं साहित्यिक विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यापक प्रसार के लिए संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराना है।

शास्त्रीय असमिया के लिए तेजपुर विश्वविद्यालय, असम; शास्त्रीय बंगाली के लिए विश्वभारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल; शास्त्रीय मराठी के लिए डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान (डीम्ड विश्वविद्यालय), पुणे; शास्त्रीय पालि के लिए केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय और शास्त्रीय प्राकृत के लिए केंद्रीय गुजरात विश्वविद्यालय का चयन किया गया है।

इन केंद्रों में संबंधित शास्त्रीय भाषाओं में उन्नत शोध, विद्वतापूर्ण कार्य और अकादमिक गतिविधियों के लिए समर्पित मंच उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही भाषाई और साहित्यिक संसाधनों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण पर भी ध्यान दिया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि ये केंद्र संबंधित भाषाओं से जुड़ी साहित्यिक, भाषाई और ज्ञान परंपराओं के व्यापक प्रसार और उन तक पहुंच को सुगम बनाएंगे। पांच राज्यों में इनकी स्थापना से शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन एवं शोध के लिए क्षेत्रीय अकादमिक तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, पांच उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना भारत की समृद्ध भाषाई और साहित्यिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है तथा इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में शास्त्रीय भाषाओं से जुड़े शोध और विद्वतापूर्ण अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

Powered By Sangraha 9.0