गोडावण को जंगल में बसाने की तैयारी शुरू, जैसलमेर में कैप्टिव-ब्रेड पक्षियों की रीवाइल्डिंग का पहला चरण

03 Oct 2026 19:03:53
केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने रामदेवरा और सम स्थित गोडावण संरक्षण प्रजनन केंद्रों की प्रगति की समीक्षा की


नई दिल्ली, 03 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान के राज्य पक्षी और गंभीर रूप से संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण की दिशा में शनिवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव-ब्रेड गोडावण को जंगल में पुनः बसाने की प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत दो कैप्टिव-ब्रेड पक्षियों को सॉफ्ट-रिलीज सुविधा से विशेष बाड़े में स्थानांतरित किया जाएगा और रविवार को आगे की प्रक्रिया के तहत उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी है।

करीब एक दशक से चल रहे गोडावण संरक्षण कार्यक्रम में यह रीवाइल्डिंग की दिशा में अहम चरण है। इसका उद्देश्य कैप्टिव-ब्रेड पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाना, उनके स्वाभाविक व्यवहार को विकसित करना और भविष्य में उनकी संख्या बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया तैयार करना है।

इस अवसर पर भूपेंद्र यादव ने कहा कि गोडावण का थार क्षेत्र से भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। उन्होंने संरक्षण कार्यक्रम में वन विभाग, वैज्ञानिकों, स्थानीय समुदायों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने गोडावण के पुनर्वास की शुरुआत को राजस्थान के लिए गौरव का दिन बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से थार की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े इस पक्षी के संरक्षण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

सम और रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण केंद्रों में इस समय कुल 97 पक्षी हैं। इनमें 40 जंगल से प्राप्त अंडों से और 57 कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए पैदा हुए हैं। इनमें से 86 पक्षियों को प्रजनन के लिए रखा गया है, जबकि 11 को जंगल में छोड़ने के लिए चिह्नित किया गया है। कैप्टिव ब्रीडिंग के तहत 2025 में 24 और 2026 में 29 जीवित चूजों का जन्म हुआ है।

कार्यक्रम के पहले चरण से मिलने वाले वैज्ञानिक अनुभवों के आधार पर भविष्य में गोडावण को जंगल में छोड़ने के प्रोटोकॉल को और बेहतर बनाया जाएगा।

गोडावण संरक्षण कार्यक्रम में ‘जंपस्टार्ट’ प्रयोग भी किया गया। इसके तहत कैप्टिव-ब्रेड अंडों को जंगल में गोडावण के प्राकृतिक घोंसलों में रखा गया। मादा गोडावण ने इन अंडों को स्वीकार कर उन्हें सेया। इस प्रयोग से राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजे पैदा हुए हैं।

गोडावण के प्राकृतिक आवास को मजबूत करने के लिए राजस्थान वन विभाग ने डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़बंद घासभूमि विकसित की है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के दीर्घकालिक टेलीमेट्री अध्ययन के अनुसार यह क्षेत्र गोडावण के प्रमुख प्रजनन स्थलों में शामिल है।

रामदेवरा में करीब 9.25 करोड़ रुपये की लागत से 160 मीटर लंबी, 64 मीटर चौड़ी और 14 मीटर ऊंची रीवाइल्डिंग एवियरी बनाई गई है। बिना खंभों वाली इस संरचना में पक्षियों को पर्याप्त उड़ान क्षेत्र मिलता है। यहां वे उड़ान की मांसपेशियां विकसित करने, प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल होने और स्वाभाविक व्यवहार सीखने के बाद जंगल में छोड़े जाने के लिए तैयार होंगे।

गोडावण थार के घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण अम्ब्रेला स्पीशीज है। इसके संरक्षण से जैव विविधता के साथ स्थानीय समुदायों को ईको-टूरिज्म के जरिए आर्थिक लाभ मिलने की संभावना भी है। गोडावण रिकवरी कार्यक्रम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान की संयुक्त पहल है। इसमें इंटरनेशनल फंड फॉर हाउबारा कंजर्वेशन का तकनीकी सहयोग और नेशनल कैंपा से वित्तीय सहायता मिल रही है। कार्यक्रम में संरक्षण प्रजनन, आवास बहाली, खतरों को कम करने, वैज्ञानिक निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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